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बैन के बावजूद टीआईएसएस के 200 छात्रों ने देखी डॉक्यूमेंट्री

मुंबई। पीएम मोदी पर बनी बीबीसी की विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री एक बार फिर सुर्खियों में हैं। जहां टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के 200 से अधिक छात्रों ने चेतावनी के बाद भी इसे देखा। अब इसको लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। दरअसल पहले बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री की टीआईएसएस में स्क्रीनिंग की जानी थी जिसका भाजयुमो ने कड़ा विरोध करते हुए प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद संस्थान की ओर से सफाई दी गई कि विवादित बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को नहीं दिखाया जाएगा। वहीं अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब संस्थान ने मना किया तो भी कैसे छात्रों ने इसे देखा। कैंपस में हिंसा न होने पाए इसको लेकर मुंबई पुलिस की भी तैनाती की गई थी। बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को लेकर मचे बवाल के बीच संस्थान ने सफाई पेश करते हुए कहा कि हमारी तरफ से इस पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई थी। हालांकि इसको लेकर जांच कराई जाएगी कि मना करने के बाद भी कुछ छात्रों ने इसे कैसे देखा। पीएम नरेंद्र मोदी पर बीबीसी की प्रतिबंधित डॉक्यूमेंट्री को दिखाए जाने की मुहिम प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम ने छेड़ी थी। इस हफ्ते की शुरुआत में टीआईएसएस कैंपस में प्रदर्शित करने का आह्वान पीएसएफ ने किया था जिसके बाद स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी इसका समर्थन किया। बीते शुक्रवार को जब विरोध होने लगा तो इसके बाद टीआईएसएस स्टूडेंट्स यूनियन डॉक्यूमेंट्री का क्यूआर कोड भी साझा किया। संस्थान ने बीते शुक्रवार और शनिवार को दो एडवाइजरी जारी कीं। इसके बावजूद विरोध में लगे छात्र अपनी योजना पर आगे बढ़े।

हालांकि संस्थान की ओर से कहा गया कि यह पूरी गंभीरता के साथ है कि कुछ छात्र समूह 27 जनवरी को बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के संबंध में जारी एडवाइजरी का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों में लगे हुए हैं। शांति और सद्भाव के मामले पर प्रासंगिक संस्थागत नियमों से निपटा जाएगा। पीएसएफ के सदस्य और एसएफआई की केंद्रीय समिति के सदस्य रामदास प्रीनी शिवनंदन ने कहा कि शुरुआत में हमने एक लैपटॉप पर डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग शुरू की। इसके बाद फिर छात्रों की संख्या बढ़ने पर नौ और लैपटॉप जोड़े। यह एक स्क्रीनिंग थी लेकिन सामान्य प्रोजेक्टर और बड़ी स्क्रीन पर नहीं। उनमें से कुछ ने अपने सेलफोन पर फिल्म भी देखी। उन्होंने कहा कि शाम को प्रशासन के साथ बैठक हुई जिसमें अधिकारियों ने स्क्रीनिंग सुविधाएं प्रदान करने से इनकार कर दिया। पीएसएफ की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में समूह ने स्क्रीनिंग को सफल बनाने के लिए संस्थान के बहादुर छात्रों को बधाई दी। बयान में कहा गया कि सामूहिक रूप से टीआईएसएस के छात्रों ने हमारे संस्थान की बहस चर्चा और सबसे महत्वपूर्ण असहमति की संस्कृति को बरकरार रखा। टीआईएसएस के खिलाफ बदनाम अभियान और प्रशासन द्वारा किसी भी तरह के सहयोग से इनकार करने के बावजूद 200 से अधिक छात्रों ने एकजुटता दिखाई।

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