ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
व्यापार

जल्द नहीं थमेगा ब्याज दरों में वृद्धि का दौर, फिर बढ़ेगा रेपो रेट ! 

आरबीआई ब्याज दरों में अभी राहत नहीं देना चाहता है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को जारी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के ब्योरे में इसका संकेत दिया है। ब्योरे के मुताबिक, दास ने कहा कि ब्याज दरों में वृद्धि का दौर जल्द थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, अगर तरलता को कम करने की कोशिश के तहत की जा रही वृद्धि को सही वक्त आने से पहले रोक दिया गया तो यह नुकसानदेह साबित हो सकता है। आरबीआई की दिसंबर के पहले सप्ताह में हुई एमपीसी की बैठक में रेपो दर में 0.35 फीसदी की वृद्धि की गई थी।

इस वृद्धि को सही ठहराते हुए दास ने कहा, मेरा मानना है कि मौद्रिक नीति कार्रवाई में वक्त से पहले ठहराव लाना इस वक्त एक बड़ी नीतिगत भूल साबित होगी। अभी भविष्य की स्थिति काफी अनिश्चय है। ऐसे में ब्याज दरों में बढ़ोतरी रोकने से ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं, जिनमें महंगाई दर का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसा होने पर हमें और ज्यादा कड़े नीतिगत फैसले करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

एमपीसी सदस्य जयंत वर्मा ने किया था विरोध 
एमपीसी सदस्य जयंत आर वर्मा ने रेपो दर में 0.35% वृद्धि के खिलाफ मतदान किया था। उन्होंने कहा था, मेरा मानना है कि 6.25% की रेपो दर आर्थिक वृद्धि के लिए जोखिम है। उदार रुख वापस लेने से विकास के नरम दृष्टिकोण को नुकसान हो सकता है।

Related Articles

Back to top button