ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
महाराष्ट्र

 मुंबई में खसरे का कहर, अब तक 8 बच्चों की मौत, 184 मामले आए सामने

मुंबई में खसरे के प्रकोप ने चिंता बढ़ा दी है। यहां खसरा बीमारी नियंत्रण से बाहर हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अब तक मुंबई में 184 मामलों की पुष्टि की गई है तो वहीं आठ बच्चों की मौत हो चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में इस साल खसरे के मामलों में कई गुना वृद्धि देखी गई है,

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल खसरे के कारण होनी वाली मौतों में भी उछाल आया है। मुंबई में 2019 में खसरे से तीन मौतें दर्ज की गई थीं। 2020 में भी तीन मौतें हुई थीं, हीं, 2021 में एक-एक मौत की सूचना मिली थी। जबकि, इस साल अब तक आठ बच्चों की मौत हो चुकी है।

अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ मुंबई ही नहीं, बाहर भी खरसे का प्रकोप बढ़ रहा है। 17 नवंबर तक पूरे राज्य में इस बीमारी के 503 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें ठाणे जिले के भिवंडी सात मामलों और नासिक के मालेगांव में पांच मामले सामने आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में पूरे राज्य में 153, 2020 में 193 और 2021 में 92 मामले सामने आए थे।

क्या हैं लक्षण
बीएमसी की पूर्व में जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि खसरे में बच्चे को बुखार, सर्दी, खांसी और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। इस बीमारी से जटिलताएं उन बच्चों में गंभीर हो सकती हैं जिन्हें आंशिक रूप से टीका लगाया गया है या जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि खसरे के मामलों में अचानक से हुए इजाफे के प्रमुख कारणों में खराब जीवन यापन का तरीका, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, खराब पोषण, निम्न प्रतिरक्षा और टीकाकरण की कमी है।

Related Articles

Back to top button