मध्यप्रदेशमुरैना
मुरैना किसान मेला में जल्दी खाना खत्म होने से कई किसान भूखे लौटे मामा शिवराज की हुई किरकिरी
मुरैना में आयोजित तीन दिवसीय किसान मेले में आने वाले सैकड़ों किसान भूखे घर लौट गए। यह किसान दिन भर भूखे प्यासे बैठे रहे। जब कार्यक्रम खत्म हो गया तो भोजन का टोकन लेकर जब भोजन लेने पहुंचे तो वहां भोजन खत्म हो चुका था। भूखे-प्यासे किसान मीडिया के सामने व्यवस्थापकों को कोसते नजर आए। डबरा के नुनारी निवासी कप्तान सिंह रावत किसान मेले में पहुंचे थे। जब वे टोकन लेकर खाने के लिए पहुंचे तो उन्हें खाना नहीं मिला। जब उन्होंने पूछा कि खाना क्यों नहीं है तो उन्हें बताया गया कि खाना खत्म हो गया है। यह स्थित सैकड़ों उन जैसे किसानों की रही जो सबलगढ़, कैलारस, भिण्ड व ग्वालियर से किसान मेले में शामिल होने गए थे। भोजन पांडाल में भीड़ भोजन पांडाल में भीड़ पहले ही दिन खुली अव्यवस्थाओं की पोल किसान मेले की व्यवस्थाओं की पहले ही दिन पोल खुल गई। पहले ही दिन सैकड़ों किसानों को भूखे वापस लौटना पड़ा। ये किसान यह कहते नजर आए कि जब भोजन की व्यवस्था नहीं थी तो उन्हें भोजन का आश्वासन क्यों दिया गया। टोकन लिए भूखी खड़ी महिलाएं, नहीं मिला खाना टोकन लिए भूखी खड़ी महिलाएं, नहीं मिला खाना टोकन हाथ में पकड़े रह गए किसान कार्यक्रम में आए किसानों सुबह से ही चल पड़े थे। इन किसानों को उनके सरपंचों द्वारा लाया गया था। कोई सबलगढ़ तो कोई पोरसा, कोई डबरा ग्वालियर व भिण्ड के दूर-दराज क्षेत्रों से आया था। सुबह से भूखे चले किसान दोपहर के 3 बजे जब खाना मिला तो खाने पर टूट पड़े। हालत यह हो गई कि एक के ऊपर एक को चढ़कर भोजन लेना पड़ा। उसके बावजूद सैकड़ों किसान भोजन से वंचित रह गए क्योंकि जब तक उनका नंबर आया, खाना खत्म हो चुका था। खराब होने के कारण किसानों ने छोड़ा चार जगह थी भोजन की व्यवस्था मेले में आने वाले लोगों के लिए चार जगह भोजन की व्यस्था की गई थी। वीआईपी लोगों के लिए अलग व्यवस्था थी। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के लिए अलग व्यवस्था थी। कर्मचारियों के लिए अलग तथा सबसे अंत में किसानों के लिए सबसे निचले स्तर की व्यवस्था की गई थी, उसके बावजूद किसानों को भूखे लौटना पड़ा। खराब हो गई भिण्डी की सब्जी किसानों ने बताया कि उनके भोजन के पैकेट में भिण्डी की जो सब्जी थी वह खराब हो चुकी थी। सब्जी खराब होने व पूड़ियां सूख जाने के कारण कई किसानों ने भोजन ले तो लिया लेकिन खाया नहीं और उसे जमीन पर ही पड़ा छोड़ दिया। इन किसानों ने फिर बाजार में जाकर भोजन किया।






