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मध्यप्रदेश

5 करोड़ की राशि से कॉलोनी के अधूरे विकास कार्य होंगे पूर्ण, 22 साल से 300 से अधिक कर्मचारियों को भूखंड का इंतजार

धार: धार जिले के 300 से अधिक सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। पिछले 22 सालों से भूखंड के हक का इंतजार कर रहे कर्मचारियों की कॉलोनी में अधूरे विकास कार्य को गति अब मिलना शुरू होगी। करीब दो दशक बाद कर्मचारी हित से जुड़े मुद्दे पर धार कलेक्टर डॉ पंकज जैन की सक्रियता से गंभीरता के साथ प्रयास शुरू करवा दिए है।टीएल में कलेक्टर द्वारा कर्मचारी आवास कॉलोनी का मामला लेने के बाद अब हाउसिंग बोर्ड ने कॉलोनी के प्रथम चरण के अधूरे विकास कार्य एवं द्वितीय चरण में सीसी रोड सहित अन्य कार्यों को पूर्ण कराने के लिए निगम से करीब 5 करोड़ की राशि के लिए पञ लिखा है। इस मामले में भोपाल स्तर पर भी जल्द राशि जारी करवाने के लिए चर्चा की जा रही है। राशि आवंटन पर कॉलोनी में विकास कार्य पूर्ण होते ही जमीन का हक मिल जाएगा।यह है मामलादरअसल ग्राम जेतपुरा में सन् 2000 में खसरा क्रमांक 47, 48, 50 पैकी व 60 पैकी की 12 हैक्टेयर शासकीय भूमि तत्कालीन कलेक्टर द्वारा राज्य कर्मचारी आवास योजना के लिए आवंटित की थी। इस कॉलोनी में विकास कार्य के लिए मप्र गृहनिर्माण मंडल धार को नियुक्त किया गया था। उस दौरान ड्रेनेज, टंकी, विद्युत पोल सहित कई काम करवाए गए थे। इसके पश्चात पेयजल आपूर्ति को लेकर निकाय को राशि जारी की गई थी। किंतु इसके बाद कर्मचारियों को भूखंड आवंटित नहीं किए गए।इस दौरान दशकों तक कर्मचारी भूखंड के शुल्क के रूप में अपने परिश्रम की कमाई जमा कराते रहे है, लेकिन उन्हें आज तक रजिस्ट्री का हक नहीं मिल पाया है। तत्कालीन कलेक्टर जयश्री कियावत के हस्तक्षेप से कलेक्टर कार्यालय के जमादार अमरसिंह राठौर की रजिस्ट्री हो गई थी। कॉलोनी में एक मात्र मकान राठौर का बना है। वहीं 2-3 और मकान अधूरे बने पड़े है। दो दशक में पूर्व में कराए गए विकास कार्य भी जीर्णशीर्ण स्थिति में हो गए है। कॉलोनी लावारिस की स्थिति में हो गई है। अब एक बार फिर समयलंबित पत्रों की समीक्षा में कॉलोनी का मुद्दा धार कलेक्टर द्वारा शामिल करने के बाद अब कुछ कर्मचारियों अच्छा होने की उम्मीदें बंधी है।10 करोड़ की जमीन नहीं बिकीराज्य कर्मचारी आवास निगम के माध्यम से ग्राम जेतपुरा में करीब 12 हैक्टेयर भूमि पर कर्मचारी आवास कॉलोनी विकसित की जा रही थी। इसमें 326 कर्मचारियों ने भूखंड के लिए पैसे जमा कराना शुरू किया था। 488 भूखंड पूरी कॉलोनी में थे। अभी भी करीब 162 भूखंड विक्रय नहीं हुए है। वर्तमान में इनकी कीमत करीब 10 करोड़ से अधिक आंकी जा रही है।अधूरे विकास कार्य को पूर्ण कराने के बाद जहां 326 कर्मचारियों को 20-25 साल इंतजार के बाद हक मिलेगा। वहीं विक्रय ना किए गए भूखंड को विक्रय करने से विकास कार्यों के लिए लगाई गई राशि के अतिरिक्त करोड़ों की राशि प्राप्त हो सकेगी।

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