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मध्यप्रदेश

सीएम शिवराज का एक लाख पदों पर नियुक्ति का वादा, 80 हजार पदों पर ही होगी फ्रेशर्स की भर्ती

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक साल में एक लाख रिक्त पदों को भरने की घोषणा की है, लेकिन इनमें से फ्रेशर्स की भर्ती 80 हजार पदों पर ही की जाएगी। शेष 20 हजार पद पूर्व से कार्यरत संविदा कर्मचारियों से भरे जाएंगे। हालांकि संविदा कर्मचारियों को भी फ्रेशर्स की तरह भर्ती परीक्षा में शामिल होना होगा। प्रदेश में विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की संख्या करीब 72 हजार है। सामान्य प्रशासन विभाग ने एक लाख पदों में से 20 प्रतिशत पद संविदा कर्मचारियों के लिए आरक्षित करने के संबंध में सभी विभागों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि शासन के ध्यान में लाया गया है कि 20 प्रतिशत आरक्षण किस प्रकार लागू किया जाए। साथ ही नियमित पदों पर भर्ती के लिए पर्याप्त संख्या में संविदा कर्मियों की उपलब्धता नहीं होने पर शेष पदों को किस प्रकार भरा जाए। पत्र में यह भी कहा गया है कि उपरोक्त क्रम में यह स्पष्ट किया जाता है कि संविदा हेतु आरक्षित 20 प्रतिशत पदों पर होरिजेंटल आरक्षण लागू होता है। अत: पर्याप्त संख्या में संविदा कर्मियों की उपलब्धता नहीं होने पर शेष पदों को रोस्टर अनुसार गैर संविदा अभ्यर्थियों से भरा जाएगा।

रिक्त पदों की संख्या एक लाख 5 हजार हुई

सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के बाद भी कुछ विभागों ने रिक्त पदों की जानकारी नहीं भेजी थी। इसको लेकर जीएडी ने इन विभागों को हर हाल में गत 12 अक्टूबर तक रिक्त पदों की जानकारी देने के संबंध में निर्देश दिए थे। इन विभागों की ओर से जानकारी भेज दी गई है। रिक्त पदों की संख्या करीब 3 हजार और बढ़ गई है। गौरतलब है कि पूर्व में विभिन्न विभागों की ओर से भेजी गई जानकारी के मुताबिक राज्य संवर्ग के रिक्त पदों की संख्या 1 लाख 1 हजार 958 थी। स्कूली शिक्षा विभाग में राज्य संवर्ग के सबसे ज्यादा 45 हजार 767 पद रिक्त हैं। अब यह संख्या बढ़कर करीब एक लाख 5 हजार हो गई है। अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग विनोद कुमार का कहना है कि एक लाख पदों पर भर्ती की प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन किया जा रहा है। जिस वर्ग को जितना आरक्षण निर्धारित है, उतना दिया जा रहा है। इसी कड़ी में सभी विभागों को संविदा कर्मचारियों को 20 प्रतिशत पद आरक्षित करने के संबंध में पत्र लिखा गया है। विभागों की ओर से कैडर के हिसाब से प्रस्ताव मप्र लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड को भेजे जा रहे हैं।

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