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छत्तीसगढ़

योगेश ठाकुर की याचिका आवेदन सुनने के बाद उच्चतम न्यायालय ने मांगा जवाब, चार सप्ताह बाद फिर सुनवाई

रायपुर: सर्वोच्च न्यायालय में अपील के लिए राज्य सरकार भी तैयारी कर रही है।उच्चतम न्यायालय ने आदिवासी आरक्षण वाले मुद्दे पर छत्तीसगढ़ सरकार और गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी को नोटिस जारी किया है। जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने योगेश ठाकुर की याचिका आवेदन की सुनवाई के बाद यह नोटिस जारी हुई। सरकार को इसका जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। उसके बाद अदालत मामले को फिर से सुनेगी।छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 19 सितम्बर को एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण को असंवैधानिक बता दिया। ऐसा करते हुए अदालत ने आरक्षण अधिनियम को रद्द कर दिया। इसके बाद से आदिवासी समाज में आंदोलन शुरू हो गए हैं। सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अपील करने की बात कही है। हालांकि अभी तक सरकार अपील का आधार ही तय नहीं कर पाई है। इधर आदिवासी कार्यकर्ता और विधिक सलाहकार बी.के. मनीष, प्रकाश ठाकुर, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ और योगेश कुमार ठाकुर ने अपील याचिका के लिए आवेदन दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये चारो लोग उच्च न्यायालय में पक्षकार नहीं थे। ऐसे में तकनीकी तौर पर अपील नहीं कर सकते। लेकिन न्यायालय इसकी अनुमति दे सकता है। सोमवार को योगेश कुमार ठाकुर के आवेदन पर चर्चा के बाद जस्टिस गवई ने इसको स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और दूसरे पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।आरक्षण मामले में अब तक क्या हुआ हैराज्य सरकार ने 2012 आरक्षण के अनुपात में बदलाव किया था। इसमें अनुसूचित जनजाति वर्ग का आरक्षण 32% कर दिया गया। वहीं अनुसूचित जाति का आरक्षण 12% किया गया। इस कानून को गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। बाद में कई और याचिकाएं दाखिल हुईं।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 19 सितम्बर को इसपर फैसला सुनाते हुये राज्य के लोक सेवा आरक्षण अधिनियम को रद्द कर दिया। इसकी वजह से आरक्षण की व्यवस्था खत्म होने की स्थिति पैदा हो गई है। शिक्षण संस्थाओं में भी आरक्षण खत्म हो गया है। भर्ती परीक्षाओं का परिणाम रोक दिया गया है। वहीं कॉलेजों में काउंसलिंग नहीं हो पा रही है।CG में आरक्षण पर नए विधेयक की बात अटकी:कैबिनेट में अफसरों ने कहा- केवल जनगणना के सहारे गए तो OBC आरक्षण फंस जाएगा

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