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सुदामा चरित्र व भक्ति का सुंदर वर्णन करते हुए बताया कि प्रभु सेवा में आतुरता चाहिए शिथिलता नहीं -श्री बल्भाचार्य जी के वंशज गो.श्री गोवर्धनेश जी महाराज (श्री दर्शन कुमार जी महाराज)

(रिपोर्ट प्रस्तुति -दिनेश सिकरवार) मुरेना -महेश्वरी परिवार द्वारा राधिका पैलैस मुरेना में आयोजित कराई जा रही कथा के आज सप्तम् दिवस पर भागवत् कथान्तर्गत भागवताचार्य श्री बल्भाचार्य जी महाराज के वंशज गो.श्री गोवर्धनेश जी महाराज ( दर्शन कुमार जी महाराज) ने भागवत् कथा का श्रद्धालुओं को कथा का श्रवण कराते हूए भक्तों को श्रीमदभागवत् की कथा में सप्तम दिवस जिसके छः धर्म हैं उन्हें भगवान कहते हैं। श्री ज्ञान वैराग्य ऐश्वर्य आदि छः धर्म विराजमान हैं प्रभु जो कहते हैं वह लीला है एवं जो हम करते हैं, वह कर्म है , प्रभु सेवा में आतुरता चाहिए शिथिलता नहीं प्रभु की सेवा सेवा के बिना एक पल भी नहीं रहा जाय तब प्रभु जीव पर कृपा करते हैं। ठाकुर जी के चरण स्पर्श करने से मन स्थिर होता है। यहाँ नहीं भटकता भगवान के मथुरा गमन लीला का आपने बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया एवं कुन्जा शरणगति सहित कँस के उद्धार का बड़ा शाश्वत वर्णन किया । उद्धव ब्रज गमन प्रसंग में आप श्री ने बताया कि ब्रज में गोपियाँ जब दही मंथन करतीं तो कृष्ण नाम की ध्वनी निकलती उद्धव जी को सुनाई दी आगे आप ने बताया कि विरह अवस्था में अपने प्रिय का सुखद समाचार या सखा मिल जाए तो आनंद की अनुभूति होती है। इसी प्रकार गोपियाँ आनंदित हुईं आपने सुदामा चरित्र में बताया कि जिसकी भगवान में आशक्ति बनी रहे वही असली में सुदामा है। जिसको प्रभु ने संपत्ति दी लेकिन उसका मन सदां प्रभु में लगा लगा रहा आपने निवि राजा के प्रसंग में भक्त के लक्षण बताए। संपूर्ण संसार में प्रभु का अंस मानकर राग द्वेष से रहित हो वही सच्चा भक्त है। आपने प्रवर्ति एवं निकृति धर्म की व्याख्या की साथ ही आपने कलयुग का वर्णन किया इसी के साथ ही आपने भागवत् कथा का पूर्ण विराम हुआ। वक्ता श्री बल्भाचार्य जी के वंशज गो.श्री गोवर्धनेश जी महाराज (दर्शन कुमार जी महाराज)

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