ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश

मोबाइल एप से लगेगा बिजली चोरी पर अंकुश, गड़बड़ी रोकने में मिलेगी मदद

भोपाल। अब बिजली चोरी रोकने के लिए मप्र मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मोबाइल एप की मदद लेगी। इसके उपयोग से बिजली संबंधी अन्य गड़बड़ी पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। विद्युत वितरण कंपनी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बिजली चोरी पकड़ने और गड़बड़ी को रोकने के लिए मोबाइल एप का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान बिजली चोरों का डिजिटल पंचनामा बनाया जाएगा।

चोरी का डिजिटल पंचनामा

जानकारी के अनुसार कंपनी ने एक ऐसा एप तैयार किया है, जिस पर ही बिजली चोरों के डिजिटल हस्ताक्षर लिए जाएंगे और प्रकरण रियल टाइम में बिजली साफ्टवेयर के सर्वर में दर्ज हो जाएगा। इससे बिजली कर्मचारी भी बिल में कोई गड़बड़ी नहीं कर पाएंगे। यह एप जीपीएस से जुड़ा है। जिसमें पंचनामों का दिन, समय व तारीखें सभी स्वत: दर्ज हो जाती हैं।

तीन महीने में न्यूनतम स्तर पर लाना है लाइन लास

बिजली अफसरों को तीन माह में लाइन लास को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए कहा गया है। बिजली चोरी बहुल क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान के साथ बकाया राशि की वसूली भी होगी। अभी भोपाल में कई क्षेत्रों में 45 प्रतिशत तक बिजली चोरी होती है। पुराना शहर इसमें सबसे आगे हैं। 15 प्रतिशत के लास को तकनीकी लास मानते हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिजली चोरी रोकने के लिए डिजिटल पंचनामे की प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जा रहा है। एप पर ही पूरा प्रकरण दर्ज होगा। इसमें किसी तरह का हेरफेर नहीं हो सकेगा। अभी पंचनामा आफलाइन बनाए जाते हैं, जिसकी एक प्रति संबंधित व्यक्ति को भी उपलब्ध कराई जाती है।

इनका कहना है

बिजली बिल में पारदर्शिता के लिए डिजिटल पंचनामों पर जोर दिया जा रहा है। ताकि बिजली आपूर्ति और व्यवस्था में सुधार हो सके। इससे जांच दल पर भी निगरानी रखी जा सकेगी।

– जीएस मिश्रा, एमडी, मप्र मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

Related Articles

Back to top button