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मध्यप्रदेश

हाई कोर्ट ने तीन भाइयों की फांसी की सजा को अंतिम सांस तक उम्रकैद में बदला, दोहरे हत्याकांड का मामला

जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजय पाल व न्यायमूर्ति बीके द्विवेदी की युगलपीठ ने दोहरे हत्याकांड मामले में तीन भाइयों जबलपुर निवासी विनय कुशवाहा, रवि कुशवाहा व राजा कुशवाहा को मिली फांसी की सजा को अंतिम सांस तक उम्रकैद में बदल दिया। कोर्ट ने आरोपितों की आयु व उनमें सुधार व पुनर्वास की संभावना को देखते हुए आदेश पारित किया। यह मामला जबलपुर के गोरखपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ढाई वर्ष पूर्व नाली के मामूली विवाद पर दंपति की हत्या के अलावा तीन अन्य के ऊपर प्राणघातक हमले के आरोप से संबंधित था।

ये है पूरा मामला

अभियोजन के अनुसार सांई कालोनी निवासी गोलू कुशवाहा का पड़ोस में रहने वाले रिश्तेदार विनय कुशवाहा से नाली के पानी की निकासी को लेकर विवाद चल रहा था। 14 जून, 2021 को गोलू अपने घर पर रात्रि करीब ग्यारह बजे खाना खा रहा था। उसी दौरान आरोपित पड़ोसी विनय कुशवाहा, रवि कुशवाहा व राजा कुशवाहा बाउंड्री कूदकर गोलू के घर अंदर जा घुसे। उन्होंने पत्नी रुचि पर चाकू से हमला कर दिया और उसके बाद उसके बेटे प्रतीक पर भी चाकू से हमला किया।

गोलू का भाई पुष्पराज व उसकी पत्नी नीलम बीच-बचाव करने आये तो आरोपितों ने उन पर भी चाकू व लाठियों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपित मौके से फरार हो गए थे। घायलों को मेडिकल अस्पताल ले जाया गया था। जहां डाक्टरों ने पुष्पराज तथा उसकी पत्नी नीलम को मृत घोषित कर दिया।

तीनों आरोपितों को फांसी की सजा

पुलिस ने मामले में हत्या, हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। सुनवाई दौरान पेश किए गए साक्ष्य व गवाहों के आधार पर सेशन कोर्ट ने तीनों आरोपितों को फांसी की सजा सुना दी थी। साथ ही मृत्युदंड की पुष्टि के लिए उक्त प्रकरण हाई कोर्ट भेजा गया था। इसके अलावा सजा के विरुद्ध आरोपितों की ओर से अपील भी दायर की गई थी।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपितों की आयु 35, 24 व 23 वर्ष है। उन्होंने एकराय होकर दो परिवारों पर हमला किया और किसी तरह का पश्चाताप नहीं किया। वे निचले व मध्यम तबके के हैं। समाज को भयभीत करने की मंशा से जघन्य अपराध किया। उनके सुधार व पुनर्वास की संभावना से मना नहीं किया जा सकता। लिहाजा, फांसी की सजा को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास में बदला जाता है।

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