ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
देश

‘पत्नी सेक्स करने नहीं देती है मुझे तलाक चाहिए’ पति की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनाया शानदार फैसला

नई दिल्ली: कोरोना काल के बाद से देश में तलाक और घरेलू हिंसा के मामले में तेजी से इजाफा हुआ है। आए दिन देश के अलग-अलग कोर्ट में ऐसे मामले दर्ज हो रहे हैं। तलाक का एक ऐसा ही मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसके बाद कोर्ट ने तलाक देने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए ये भी कहा कि विवाहित जोड़ों के बीच चिड़चिड़ेपन, मामूली मनमुटाव और विश्वास की कमी को मानसिक क्रूरता के साथ भ्रमित नहीं किया जा सकता है।

पति ने पत्नी द्वारा मानसिक क्रूरता के कारण तलाक मांगा और आरोप लगाया कि उसे ससुराल में उसके साथ रहने में कोई दिलचस्पी नहीं थी और वह चाहती थी कि पति उसके साथ उसके मायके में ‘घर जमाई’ के रूप में रहे। दोनों की शादी 1996 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई और 1998 में दंपति की एक बच्ची हुई। पति ने दावा किया था कि उसकी पत्नी किसी न किसी बहाने से उसे अकेला छोड़ देती थी और केवल अपना कोचिंग सेंटर चलाने में रुचि रखती थी। उसने आरोप लगाया था कि उसे यहां तक कि पत्नी उसे सेक्स करने से भी मना करती थी।

जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने पत्नी की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि यद्यपि सेक्स करने से इनकार करना मानसिक क्रूरता का एक रूप माना जा सकता है, लेकिन जब यह लगातार, जानबूझकर और काफी समय तक हो। बेंच ने कहा कि हालांकि, अदालत को ऐसे संवेदनशील और नाजुक मुद्दे से निपटने में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के आरोप केवल अस्पष्ट बयानों के आधार पर साबित नहीं किए जा सकते, खासकर तब जब शादी विधिवत संपन्न हुई हो। बेंच ने पाया कि पति अपने ऊपर किसी भी मानसिक क्रूरता को साबित करने में विफल रहा है और वर्तमान मामला ”वैवाहिक बंधन में केवल सामान्य मनमुटाव का मामला है।” बेंच ने कहा, “इस बात का कोई सकारात्मक संकेत नहीं है कि पत्नी का आचरण इस तरह का था कि उसके पति के लिए उसके साथ रहना संभव नहीं था। मामूली चिड़चिड़ापन और विश्वास की कमी को मानसिक क्रूरता के साथ भ्रमित नहीं किया जा सकता है।”

अदालत ने यह भी कहा कि केवल यह तथ्य कि महिला ने एक आपराधिक शिकायत के साथ पुलिस से संपर्क किया था, जिसके परिणामस्वरूप उसके पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिसे अंततः मामले में संदेह का लाभ दिया गया, क्रूरता नहीं होगी। अदालत ने कहा कि इस प्रकार, जो तस्वीर उभर कर सामने आती है वह बहुत स्पष्ट है। पक्षों के बीच विश्वास, आस्था और प्रेम की कमी हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद, वे दोनों परिवार को बचाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे। केवल इसलिए कि पत्नी ने अपनी शिकायत के निवारण के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जैसा कि उसके पति ने भी किया था, क्रूरता को बढ़ावा देने के समान नहीं हो सकता है।

Related Articles

Back to top button