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विद्युत विभाग की निरंकुशता, स्वेच्छाचारिता एवं दोहरी कूटनीतिक चाल से कृष्णा विहार कालोनी मुरैना में निवासरत सभी परिवार अत्यधिक परेशान”।
"विद्युत विभाग की निरंकुशता, स्वेच्छाचारिता एवं दोहरी कूटनीतिक चाल से कृष्णा विहार कालोनी मुरैना ममुरैना। विद्युत विभाग की निरंकुश, स्वेच्छाचारी छद्मनीति व एक पक्षीय कार्यवाही पर जिला प्रशासन, प्रदेश शासन का कोई नियंत्रण भी है, कि नहीं ? कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है । साथ ही यह भी समझ में नहीं आ रहा है, कि मुरैना शहर नगर निगम परिक्षेत्र अन्तर्गत शिकारपुर रेलवे फाटक के समीपस्थ "कृष्णा विहार कालोनी" में पूर्ववर्ती वाशिंदों की कतिपय चूक अथवा निगरानी से दूरस्थ बाउण्ड्री वाल के बाहरी परिक्षेत्र में विद्युत विभाग द्वारा कई वर्ष पूर्व जो बिजली सप्लाई का ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया था, उसे किसने, किन परिस्थितियों में, क्यों हटाया और कहाॅं खुर्द-बुर्द कर दिया ? इन प्रश्नों को हल क्यों नहीं किया गया? इन्हें हल किया जाना नितान्त ही आवश्यक, अपरिहार्य एवं प्रासंगिक है । ट्रांसफार्मर गायब अथवा खुर्द-बुर्द होने की तदाशयित सूचना दिये वगैर एवं अनुमति लिए वगैर उसी स्थान पर नया ट्रांसफार्मर किसने लगाया था ? स्वाभाविक समझ में तो यही आता है, कि जिसने भी उक्त नया प्राईवेट ट्रांसफार्मर लगाया होगा, सम्भवतः उसी ने क्षमता से अधिक वोल्टेज खपत के कारण कतिपय खराबी होने एवं परेशानियों से जूझने के कारण ही विद्युत विभाग द्वारा स्थापित पुराना ट्रांसफार्मर हटाया होगा और खुर्द-बुर्द किया होगा । यदि तात्कालिक तौर पर तत्समय ही उपरोक्त आशय की सूचना विद्युत विभाग एवं पुलिस विभाग को दी गई होती, तो इस मामले में "कृष्णा विहार कालोनी" में पश्चातवर्ती मकान निर्मित कर आवासित होने वाले नये परिवारों को आज यह दुविधाजनक परिस्थितियों का झमेला नहीं झेलना पड़ता, कि विद्युत विभाग वाला खुर्द-बुर्द हो चुका पुराना वैध ट्रांसफार्मर अब उपलब्ध नहीं होने तथा उसके स्थान पर प्राइवेट ट्रांसफार्मर लगा होने से वर्तमान में उपभोक्ता नियम अनुरूप चाहने वाले परिवारों को विद्युत विभाग के अधिकारी नये विद्युत कनेक्शन नहीं दे रहे हैं । सवाल यह भी उठता है, इतना बड़ा ट्रांसफार्मर आईटम गायब हो गया, लेकिन विद्युत विभाग के बीट ड्यूटी कर्मचारियों, लाईनमेन इत्यादि में से अभी तक किसी ने भी सुध नहीं ली, उन्हें तनिक भी पता नहीं ? क्या विद्युत विभाग के बीट ड्यूटी कर्मचारियों की ट्रांसफार्मर देखभाल एवं गायब होने पर विभागीय अधिकारियों को सूचना से अवगत कराने की कोई जवाबदारी नहीं रहती है, यदि नहीं तो ऐसा क्यों ? और यदि जवाबदारी रहती है, तो उन संबंधित विद्युतकर्मियों के प्रति क्या विभागीय एक्शन लिया गया, यदि नहीं लिया तो क्यों नहीं लिया ? अब ट्रांसफार्मर गुमशुदगी की जानकारी व्यापक स्तर पर पता चलने के बावजूद भी अगली क्या कार्यवाही की गयी है ? यदि कार्यवाही नहीं की है, तो क्यों नहीं की है ? वस्तुत: विद्युत विभाग के गायब पुराने ट्रांसफार्मर के स्थान पर लगाया हुआ दूसरा वर्तमान प्राईवेट ट्रांसफार्मर भी अपर्याप्त वोल्टेज क्षमता के साथ-साथ मात्र दो फेस लाईट सप्लाई में है, जो आयेदिन फ्यूज, फ्लक्चुएशन इत्यादि परेशानियों के कारण समुचित उपयोगी नहीं है । कालोनी में आबादी बढ़ने से अधिक एवं पर्याप्त वोल्टेज क्षमता व तीन फेस का ट्रांसफार्मर पुनर्स्थापित कराया जाना नितान्त आवश्यक है । सवाल यह भी है, कि यदि जब तक पुराना गुमशुदा ट्रांसफार्मर नहीं मिलेगा, क्या तब तक उक्त कालोनी में दूसरा व नया, पर्याप्त वोल्टेज क्षमता वाला ट्रांसफार्मर विद्युत विभाग नहीं लगायेगा ? क्या कालोनी के वाशिंदों को बिना लाईट इसी तरह अंधेरे में ही रहना पड़ेगा ? रात्रि के अंधियारे में चोरी, लूट, डकैती इत्यादि अपराधों का जोखिम भी झेलना पड़ेगा ? अंधेरे के कारण होने वाली किसी आपराधिक घटना के प्रति कौन जवाबदार होगा ? विकट परिस्थितियों को अवगत कराने पर विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तानाशाही अंदाज से पेश आते हैं, साथ ही वाद-विवाद अभद्रता का दोषारोपण करने व पुलिस कार्यवाही की धमकियां देते हैं, पर्याप्त वोल्टेज क्षमता वाला नया ट्रांसफार्मर नहीं लगा रहे हैं, मजबूरीवश परिवारों की पेयजल आपूर्ति और आवश्यकतानुरूप प्रकाश व्यवस्था हेतु गुजर-बसर निमित्त विद्युत का उपयोग करने पर चालान, जुर्माना लगाने विषयक कार्यवाही करने की धमकियां दी जाती हैं, तब ऐसी दशा में कालोनी के वाशिंदे क्या करें, सपरिवार पलायन करें, अथवा आन्दोलन प्रदर्शन रैलियां निकालें, अथवा कहीं डूब मरें ? आखिर इसका कुछ समाधान भी तो होना चाहिए ? अब तो स्थिति यह है, कि कृष्णा विहार कालोनी की आबादी तदनन्तर बढ़ती जा रही है, उसी अनुसार पर्याप्त वोल्टेज क्षमता वाला ट्रांसफार्मर स्थापित होना चाहिए। जब यह स्पष्ट हो चुका है, कि पुराना ट्रांसफार्मर गायब है अथवा खुर्द-बुर्द कर दिया गया है, तो उसके स्थान पर जो दूसरा प्राईवेट ट्रांसफार्मर लगाया था, वह भी पुराना हो चुका है एवं आबादी के हिसाब से अपर्याप्त वोल्टेज क्षमता वाला है, फलस्वरूप आयेदिन उसमें खराबी तथा जोखिम होता रहता है, जो सुरक्षा की दृष्टि से सर्वथा ख़तरनाक है एवं मानवीय जीवन के लिए संकटापन्न अप्रिय स्थिति उत्पन्न करने का कारण भी हो सकता है, किसी दिन कोई भी अप्रत्याशित दुर्घटना घटित हो जाएगी, तब उसका उत्तरदायी कौन होगा ? एसा विदित हुआ है, कि दिनांक- ०८/०९/२०२३ को उक्त कालोनी के कुछ वाशिंदे विद्युत विभाग के किसी वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष समस्या अवगत कराने तथा समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, परस्पर वार्तालाप संवाद में कुछ तल्ख वातावरण बना, उसी दौरान विद्युत विभाग के अधिकारी और मौके पर कव्हरेज हेतु मौजूद किसी स्थानीय दैनिक समाचारपत्र के लिए सूचना संकलन, प्रकाशन हेतु अधिकृत किसी पत्रकार/संवाददाता से परस्पर असंसदीय वाद-विवाद जैसी स्थिति बनी थी, तत्सम्बन्ध में गुण-दोषों का निश्चय प्रसंग की वस्तुस्थिति प्रसंज्ञान अनुसार ही सम्भव है एवं तत्सम्बन्ध में सम्पन्न किसी प्रकार की कार्यवाही का भी सही पता नहीं है । जैसा कि नैसर्गिक अकाट्य सत्य है, कि मनुष्य परिस्थितियों का दास है, विषम परिस्थितियों में अभाव पूर्ति हेतु अपर्याप्त क्षमता वाले ट्रांसफार्मर को बार-बार खराब होने के बावजूद ऐनकेन प्रकारेण उसे बार-बार सुधारने और विद्युत आपूर्ति के निमित्त अनेकानेक प्रयत्न करता रहता है, उसी दौरान कदाचित तनिक सी कोई लापरवाही किसी व्यक्ति की जानलेवा साबित भी हो सकती है । जिला प्रशासन को इस मामले में कड़ा हस्तक्षेप और समाधान हेतु आवश्यक पहल भी करनी चाहिए, कि पुराना गुमशुदा ट्रांसफार्मर जब मिलेगा, तब मिलता रहेगा, तत्सम्बन्ध में प्रथमदृष्टया विद्युत विभाग द्वारा प्राथमिकी संसूचना, पश्चात् सम्यक पुलिस विवेचना होनी चाहिए थी, तब तक उक्त कालोनी में पश्चातवर्ती नये आवासित परिवारों को मजबूरीवश पेयजल, प्रकाश व्यवस्थार्थ विद्युत उपभोग करने पर विद्युत चोरी का आक्षेप नहीं लगे एवं वर्तमान आबादी का त्वरित सर्वेक्षण कर सूचीबद्ध अभिलेख आधारित पर्याप्त वोल्टेज क्षमता वाला ट्रांसफार्मर पुनर्स्थापित करना चाहिए और शहर से कुछ बाहरी परिधि परिक्षेत्र में अवस्थित उक्त कालोनी के वाशिंदों को उनकी मांग अनुरूप उपभोक्ता नियमों में भरसक शिथिलता बरतते हुए रियायती दरों पर नये विद्युत कनेक्शन सुलभ कराना चाहिए। तत्पश्चात् चेतावनी सूचना जारी कर अवैध विद्युत उपभोग करने वाले तत्वों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही करनी चाहिए, ताकि "कृष्णा विहार कालोनी" मुरैना में आवासित भद्र परिवारों को विद्युत अभाव से उत्पन्न गम्भीर परेशानी से निजात व राहत मिल सके एवं उन्हें सहज, सरलता पूर्वक पर्याप्त वोल्टेज पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुलभ हो सके । जिला प्रशासन इस मामले में विद्युत विभाग की निरंकुशता, स्वेच्छाचारी गतिविधियों पर पूरी तरह नियंत्रण करे, समाधान करावे तो बेहतर होगा । अन्यथा फिलहाल तो विद्युत विभाग के अधिकारियों ने जब्ती पंचनामा साक्ष्य कार्यवाही कर हटाये गये, उक्त प्राइवेट ट्रांसफार्मर को करीब ०८-१० दिनों बाद यथावत रखवाया गया है, कदाचित इस विचार से कि चुनाव का माहौल है, मामला तूल पकड़े फिलहाल धैर्य संयम और शान्ति बनी रहे, फिर चुनाव बाद बढ़िया परेशान करेंगे । कृष्णा विहार कालोनी के निवासी भी भलीभांति समझ रहे हैं, यह भी समझ में आ रहा है, कि यदि विधानसभा चुनाव एवं उसकी आचार संहिता लागू होने से पहिले यदि विद्युत ट्रांसफार्मर स्थापित नहीं किया गया, तो बाद में यह मामला टेढ़ी खीर हो जाएगा, विद्युत विभाग ट्रांसफार्मर स्थापित नहीं करेगा, वल्कि कालोनी के वाशिंदों द्वारा मजबूरीवश पेयजल आपूर्ति और प्रकाश हेतु लाईट उपयोग करने पर चालान, जुर्माना इत्यादि गतिविधियां सक्रिय कर दी जावेंगीं । पता नहीं क्यों, हर समस्या के लिए साधारणतया, सहजता पूर्वक सरल समाधान क्यों नहीं किया जाता है ? आन्दोलन, प्रदर्शन, ज्ञापन, अनपेक्षित विरोधी स्वरों में नारेबाजी, उपद्रव कराने के बाद समस्या के समाधान हेतु कदम उठाए जाते हैं, जो समय अनुकूल साधारणतया क्यों नहीं ? ऐसा तो हो नहीं सकता, कि समस्या का कोई समाधान नहीं हो ? तो फिर जानबूझकर देरी और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशान करने, उपद्रव करने के लिए विवश क्यों किया जा रहा है ? क्या विद्युत विभाग कानून की गिरफ्त से बाहर है, उसे आम नागरिकों को परेशान करने व तानाशाही सहित रौब झाड़ने, मनमानी करने, निरंकुशता बरतने और अशिष्टता पूर्वक असंसदीय शैली में वार्तालाप करने, पत्रकारों को कव्हरेज में अनधिकृत हस्तक्षेप करने व पुलिस कार्यवाही की धमकियां देने की खुली छूट है ? जिला प्रशासन तत्काल संबंधित विद्युत अधिकारियों की अमानवीय, असंवेदनशील गतिविधियों, आचरण को संज्ञान में लेकर दैनिक जीवनशैली में विद्युत की महती आवश्यकता विषयक इस समग्र मामले में त्वरित समाधान हेतु आवश्यक पहल करे, एसी अपेक्षा है ।अगर मीडिया में समाचारों का कोई महत्व नहीं है, सजग, सावधान होकर किसी भी समस्या का सम्यक समाधान सम्भव नहीं है, सबकुछ बेअसर है, तो फिर समाचारों, सूचनाओं का औचित्य ही क्या रह जाता है ? जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, माननीय जनप्रतिनिधियों, प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विभिन्न सम्पादकों, संवाददाताओं को इस मामले में भरसक अपने-अपने स्तर से जागरुकता एवं दैनिक जीवनशैली की महत्वपूर्ण आवश्यकता अनुरूप विद्युत आपूर्ति की गहन समस्या के समाधान हेतु पर्याप्त वोल्टेज क्षमता वाला नया ट्रांसफार्मर स्थापित कराने के लिए भरसक त्वरित एवं उचित कार्यवाही सुनिश्चित करनी चाहिए ।



