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मध्यप्रदेश

कुछ सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़वा सकती है भाजपा, कुछ टिकट की दौड़ में भी

भोपाल मध्य प्रदेश में आसन्न विधानसभा चुनाव में कुछ लोकसभा सदस्य भी अपना भाग्य आजमाना चाहते हैं तो कुछ को पार्टी चुनाव लड़वाने की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि लगभग आठ सांसद ऐसे हैं जिन्हें सीधे चुनावी अखाड़े में उतारने पर विचार किया जा रहा है। वहीं चार- पांच सांसद खुद ही विधानसभा चुनाव की टिकट की दौड़ में हैं। ऐसा प्रयोग भाजपा ने पहले भी किया था।

तब सरताज सिंह, नीता पटेरिया, रामकृष्ण कुसमारिया को विधानसभा चुनाव लड़वाया गया था और ये सभी तत्कालीन सांसद विधानसभा चुनाव जीत गए थे। फिलहाल पार्टी जिन सांसदों को विधानसभा में लाना चाहती है उनमें विवेक शेजवलकर, संध्या राय, हिमाद्री सिंह, रीति पाठक, राव उदय प्रताप सिंह, गणेश सिंह, गजेंद्र पटेल और रोडमल नागर जैसे नाम हैं। विधानसभा चुनाव की टिकट की दौड़ में सांसद शंकर लालवानी, सुधीर गुप्ता और अनिल फिरौजिया शामिल हैं।

सांसदों की रुचि विधायक बनने में इसलिए भी रहती है क्योंकि पहले कुछ सांसद विधानसभा चुनाव जीतकर मंत्री बन चुके हैं। कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले होशंगाबाद लोकसभा सीट से चुनाव जीतने वाले राव उदय प्रताप सिंह भी अब विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। सिंह 2014 के पहले भाजपा में शामिल हुए थे।

पहले उनकी रुचि सिवनी मालवा या होशंगाबाद सीट पर थी लेकिन अब पार्टी उन्हें तेंदूखेड़ा से कांग्रेस के बाहुबली विधायक संजय शर्मा के विरुद्ध विधानसभा चुनाव लड़ाने पर विचार कर रही है। राजगढ़ सांसद रोडमल नागर को भी दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह की घेराबंदी के लिए विधानसभा चुनाव लड़वाया जा सकता है। जीत की संभावना और आरक्षित सीटों को साधने का गणित ग्वालियर से महापौर रहे और अब सांसद विवेक शेजवलकर का नाम भी ग्वालियर दक्षिण विधानसभा सीट के सर्वे में आया है।

संध्या राय भिंड से सांसद हैं, पहले वे विधानसभा सदस्य रह चुकी हैं। एससी सीट से संध्या को चुनाव लड़वाया जा सकता है। हिमाद्री सिंह शहडोल सांसद हैं, उनको एसटी सीट से विधानसभा का प्रत्याशी बनाया जा सकता है। सतना सांसद गणेश सिंह को भी सतना जिले की ओबीसी बहुल सीट और गजेंद्र पटेल को खरगोन की सुरक्षित सीट से प्रत्याशी बनाए जाने पर पार्टी मंथन कर रही है। इधर, उज्जैन सांसद अनिल फिरौजिया ने भी विधानसभा में लौटने की इच्छा जताई है। इंदौर सांसद शंकर लालवानी इंदौर क्षेत्र क्र.-चार से टिकट चाह रहे हैं।

यहां मालिनी गौड़ विधायक हैं। सांसदों के विधायक बनने का पुराना इतिहास वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में सांसद रहे सरताज सिंह और रामकृष्ण कुसमारिया विधानसभा चुनाव जीतकर मंत्री बन गए थे। सिर्फ नीता पटेरिया को ही उन दिनों सांसद से विधायक बनने पर मंत्री पद नहीं मिला था। भूपेंद्र सिंह भी सांसद रहने के बाद 2013 में विधानसभा लौटे और मंत्री बने। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी सांसद रहे हैं।

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