राजभवन के पास सड़क पर बेटी को जन्म देने वाली महिला के पति का दर्द… ‘डॉक्टरों ने पत्नी को हाथ तक नहीं लगाया’
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भले ही प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ी-बड़ी बाते करते हुए दिखाई देते हैं। लेकिन यह घटना उनके सभी दावों की पोल खोलती हुई नजर आ रही है। दरअसल, एक महिला ने राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित राजभवन के गेट नंबर 13 के सामने बच्चे को जन्म दिया है।
बताया जा रहा है कि गर्भवती महिला के परिजन उसे रिक्शे से अस्पताल लेकर जा रहे थे। इसी दौरान महिला को प्रसव पीड़ा होने लगी। उसके बाद स्थानीय महिलाओं ने साड़ी का घेरा बनाया। फिर महिला ने बच्ची को बीच सड़क पर जन्म दिया है। बताय जा रहा है कि उसके बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई जिसे उसकी मौत हो गई।
मृत बच्ची को अंति विदाई देने कि लिए श्मशान घाट गए डिप्टी सीएम
इस घटना की खबर डिप्टी सीएम ब्रजेश लगते ही मामले की संज्ञान लिया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। उन्होंने समय पर एम्बुलेंस के न पहुंचने संबंधित मामले को लेकर जांच के निर्देश दिए हैं। इससे पहले मृत बच्ची का अंतिम संस्कार कराने के लिए वो खुद श्मशान घाट तक गए। अस्पताल पहुंच कर पीड़ित के परिजनों से भी मुलाकात की।मृतक बच्ची को अंतिम विदाई देते हुए बृजेश पाठक
मामले को लेकर गुस्से में विपक्ष
स्वास्थ्य व्ययस्था में इतनी बड़ी लापाकवाही होने के बाद जाहिर सी बात है कि विपक्ष खामोश नहीं बैठने वाला था। घटना की वीडियो वायरल होते हो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए सरकार पर हमला बोला। अखिलेश यादव ने जो वीडियो शेयर किया है, उसमें दिखाया गया है कि कैसे सड़क किनारे साड़ी का पर्दा बनाकर कुछ महिलाएं मिलकर एक महिला की डिलीवरी में मदद कर रही हैं। बगल में ही रिक्शा खड़ा है। बताया जा रहा है कि प्रेग्नेंट महिला एम्बुलेंस आने में देरी के चलते रिक्शे से अस्पताल जा रही थी। इसी दौरान उसे लेबर पेन शुरू हो गया। जिसके बाद रिक्शा को रोक सड़क किनारे ही उसकी डिलीवरी कराई गई। लेकिन बच्चे को नहीं बचाया जा सका।
शिवपाल यादव ने साधा निशाना
सपा नेता शिवपाल यादव ने भी इस घटना का वीडियो ट्वीट करते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा- “सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था अपने लाख विज्ञापनों और दावों के बावजूद वेंटिलेटर पर है। एम्बुलेंस न मिलने पर रिक्शे से अस्पताल जा रही गर्भवती महिला को राजभवन के पास सड़क पर प्रसव के लिए मजबूर होना पड़े तो यह पूरी व्यवस्था के लिए शर्मनाक है और सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था की असल हकीकत है।”




