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इन राशियों के लिए लाभकारी है पुखराज रत्न धारण करने से होगा फायदा

ज्योतिष शास्त्र में रत्नों को व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण बताया गया है। रत्न धारण करने से ग्रहों के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। इन्हीं रत्नों में से एक पुखराज है। जिसे पीला नीलम भी कहा जाता है। इसे बृहस्पति का रत्न माना जाता है। बृहस्पति की शुभ स्थिति में पुखराज फलदायक साबित हो सकता है।

जिन जातकों की कुंडली में बृहस्पति शुभ स्थिति में होता है। उन्हें पुखराज धारण करने पर धन, करियर, शिक्षा के साथ सम्मान मिलता है। जिस प्रकार पुखराज धारण करने से कई राशियों के जातकों की सुख-समद्धि में वृद्धि होती है। उसी प्रकार यह रत्न अगर किसी गलत व्यक्ति के हाथ में पड़ जाए तो नुकसान पहुंचा सकता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पुखराज राशियों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि वालों को पुखराज पहनने से बचना चाहिए।

मेष राशि का 9वां और 12वां घर देवगुरु बृहस्पति से प्रभावित होता है। पुखराज मेष राशि वालों के लिए समृद्धि की संभावना बढ़ाता है। इससे पेशे में उन्नति की संभावना बढ़ती है।

चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है। कर्क लग्न की कुंडली में बृहस्पति छठे और नौवें भाव में हो तो पुखराज को गुरु यंत्र के साथ धारण करना चाहिए। इससे सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।

धनु राशि में बृहस्पति पहले और चौथे घर का स्वामी है। यह स्थान शुभ है। यदि धनु राशि के जातक पुखराज धारण करें तो उन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक लाभ मिलता है।

देवगुरु बृहस्पति मीन राशि में पहल और दसवें घर का स्वामी है। यदि इस राशि के जातक पुखराज धारण करें तो करियर और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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