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हम PM मोदी का घमंड तोड़ना चाहते थे…कांग्रेस ने लोकसभा में सरकार के खिलाफ दाखिल किया अविश्वास प्रस्ताव

नई दिल्ली:  मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दाखिल किया। वहींस  संसद के मानसून सत्र के पांचवे दिन कार्रवाई भी हंगामे के साथ शुरू हुई और इस  बीच लोकसभा की कार्रवाई 15 मिनट बाद ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप मनिकम टैगोर ने बताया कि हम PM मोदी का घमंड तोड़ना चाहते थे। वे संसद में आकर मणिपुर पर बयान नहीं दे रहे हैं। हमें लगता है कि इस आखिरी हथियार का इस्तेमाल करना हमारा कर्तव्य है।

इससे पहले लोकसभा में पार्टी के सचेतक मणिकम टैगोर ने कहा, “यह विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ का विचार है। हमारा मानना है कि सरकार के अहंकार को तोड़ने और मणिपुर के मुद्दे पर बोलने को विवश करने के लिए आखिरी हथियार का इस्तेमाल किया जाए।” उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को इस संदर्भ में नोटिस दिया गया है।

 गोगोई असम से आते हैं और वह लोकसभा में कालियाबोर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (I.N.D.I.A.) के घटक दलों की मंगलवार को हुई बैठक में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के बारे में फैसला हुआ था। कांग्रेस ने अपने सदस्यों को व्हिप जारी करके कहा है कि वे बुधवार को सुबह साढ़े दस बजे संसद भवन स्थित पार्टी संसदीय दल के कार्यालय में मौजूद रहें। इससे पहले 2018 में मोदी सरकार के खिलाफ आखिरी बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A.) के अन्य घटक दल मॉनसून सत्र के पहले दिन से ही मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद में वक्तव्य देने और चर्चा कराए जाने की मांग कर रहे हैं।

इस मुद्दे पर हंगामे के कारण संसद के मॉनसून सत्र के पहले चार दिन दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। मणिपुर में दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न का वीडियो गत बुधवार, 19 जुलाई को सामने आया था जिसके बाद देश भर में आक्रोश फैल गया और विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए। अधिकारियों ने बताया कि यह वीडियो चार मई का है। मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की बहुसंख्यक मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 3 मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद राज्य में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

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