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ऐसा शिवालय जहां नाव पर सवार होकर दर्शन को जाते हैं भक्त

भोपाल।राजधानी के सुरम्य स्थल कलियासोत डैम के पास टापू पर बना शिव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। श्रावण मास में यहां बाबा के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। शिवरात्रि पर यहां विशेष अनुष्ठान होते हैं। वर्ष-2021 में यहां दक्षिणमुखी हनुमान जी की मूर्ति भी स्थापित की गई है। टापू के आसपास पानी भरा रहने के कारण भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए नाव से जाना पड़ता है।

यह है मंदिर का इतिहास

वर्ष 1985-86 में कलियासोत जलाशय का निर्माण कार्य पूरा हुआ था। उस समय सरगुजा राजघराने के अरुणेश्वरसिंह देव बाबा साहब ने डैम के किनारे से कुछ दूर टापू देखा। तब यहां चारों तरफ जंगल ही था। उनके मन में टापू पर शिवालय बनाने की प्रेरणा आई। कुछ दिनों में वहां भगवान शंकर का मंदिर बनकर तैयार हो गया। मंदिर का रखरखाव श्री काशी विश्वनाथ मंदिर समिति द्वारा किया जाता है।

मंदिर की यह है विशेषता

मंदिर का जब निर्माण हुआ था, तब कलियासोत जलाशय में गेट नहीं लगे थे। इस वजह से बारिश का पूरे पानी का संग्रह नहीं हो पाता था। पानी कलियासोत नदी के माध्यम से बह जाता था। इस वजह से लोग पैदल मंदिर तक चले जाते थे। डैम में गेट लगने के बाद टापू के चारों तरफ काफी पानी रहता है। गहराई अधिक होने और पानी में कई मगरमच्छों के रहने से मंदिर जाने के लिए नाव के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मंदिर समिति श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नाव का निर्माण करा रही है।

काफी रमणीक स्थल है

कलियासोत जलाशय हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा है। चारों तरफ अथाह जल राशि के बीच भगवान भोलेनाथ का मंदिर स्थल काफी रमणीक है। टापू पर बड़ी संख्या में पोधे रोपे गए थे, जो अब वृक्ष का रूप लेने लगे हैं। गर्मी के दिनों में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

पं. बृज बिहारी तिवारी, मंदिर के पुजारी

शहर का पहला शिवालयश्री काशी विश्वनाथ मंदिर समिति द्वारा निर्मित राजधानी का यह पहला शिवालय है, जहां भगवान के दर्शन करने के लिए नाव के माध्यम से जाना होता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समिति द्वारा नाम का निर्माण कराया जा रहा है। वर्तमान में किराए पर नाव लेना होती है। विशेषकर मोटर बोट का महंगा किराया देना होता है।

कार्तिकेय तिवारी, सदस्य मंदिर समिति

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