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धार्मिक

पितरों को प्रसन्न करना चाहते हैं तो आज ही करें ये उपाय कष्टों से मिलेगी मुक्ति होगी पैसों की आवक

हिंदू धर्म में पितृपक्ष का काफी महत्व माना जाता है। पितृ पक्ष 15 दिन तक चलते हैं। इन दिनों में पितरों को याद कर पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध कर्म आदि किया जाता है। कहा जाता है कि पितरों को प्रसन्न करने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। साथ ही व्यक्ति की तरक्की होती है। हर माह की अमावस्या तिथि पर भी पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने से वे जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। उनका आशीर्वाद जातक पर बना रहता है। ज्योतिष शास्त्र में पितरों को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

– वास्तु शास्त्र के अनुसार पितरों के लिए दक्षिण दिशा में दीपक जरूर जलाना चाहिए। इसके साथ ही मुख्य द्वार को हमेशा साफ रखना चाहिए। घर के बाहर कूड़ा आदि न डालें। ऐसा करने पर नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। कहा जाता है कि पितरों को प्रसन्न करने के लिए मुख्य द्वार पर जल अर्पित करें।

– पितरों को प्रसन्न करने के लिए और उनका आशीर्वाद पाने के लिए गीता के सारे अध्याय पढ़ें। अगर आप ये नहीं कर पा रहे हैं तो पितृ मुक्ति से जुड़ा सातवां पाठ जरूर करें। इससे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

– कुछ लोग पितरों की तस्वीर घर के मंदिर में ही लगा देते हैं। शास्त्रों में इसे गलत माना गया है। घर में किसी भी मृत व्यक्ति की तस्वीर हमेशा दक्षिण दिशा में ही लगानी चाहिए। पितरों की तस्वीर ऐसी जगह लगानी चाहिए, जहां आपकी नजर हमेशा उन पर पड़े।

– वास्तु के अनुसार पितरों के लिए दक्षिण दिशा हो ही शुभ माना गया है। पितरों की तस्वीर कभी भी मंदिर या बेडरूम, ड्राइंग रूम, किचन आदि में नहीं लगानी चाहिए। ऐसा करने पर घर की सुख-शांति और वैवाहिक जीवन पर बुरा असर पड़ता है।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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