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बिना फैमिली कोर्ट भेजे भी सुप्रीम कोर्ट दे सकता है तलाक सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट की व्यवस्था

 सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के एक मामले में सुनवाई करते हुए सोमवार को अहम व्यवस्था दी। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि वह फैमिली कोर्ट में केस चलाए बिना भी पति-पत्नी को आपसी सहमति से तलाक की अनुमति दे सकता है।

बिना फैमिली कोर्ट तलाक, सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बड़ी बातें

जस्टिस एसके कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस एएस ओक, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने यह व्यवस्था दी है।

मामले में सुनवाई पूरी करते हुए पीठ ने 29 सितंबर 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।

पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शीर्ष न्यायालय को प्राप्त असीम शक्तियों का उपयोग करते हुए वह तलाक का फैसला सुना सकता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो यदि कोई पति-पत्नी शादी को जारी नहीं रख पा रहे हैं और तलाक के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं तो सर्वोच्च अदालत उन्हें फैमिली कोर्ट भेजने के बजाए खुद ही अलग होने का आदेश जारी कर सकती है।

क्या कहता है संविधान का आर्टिकल 142

संविधान का अनुच्छेद 142 अपने समक्ष लंबित किसी भी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों से संबंधित है।

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