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जे.सी.मिल्स की 31 वीं पुण्य तिथि पर विशेष।
(राजकुमार भदौरिया) 20 वर्ष पूर्व चुकता हो सकता था मिल कामगारों का लंबित भुगतान*! __________________ ग्वालियर -- औद्योगिक विवादों में श्रम और पूँजी की जंग में प्रायः पराजय सदैव श्रम की होती है! क्योंकि पूँजी के पास वह ताकत होती है! जिससे वह न्यायालय से लेकर सभी प्रशासनिक ब्यवस्था अपने पूँजी के दम पर अपनी इच्छा नुसार संचालित करने में कामयाब हो जाता है, वहीँ दूसरी ओर औद्योगिक कामगार अपनी बेरोजगारी, आर्थिक बदहाली और बौध्दिक क्षमताओं के अभाव में सदैव शासन, प्रशासन और संगठन के नेताओं पर आधारित रहता है,और वे पहले से ही पूंजीपतियों के हाँथों में होते हैं. पूंजीपतियों सहित सरकार भी ये जानती है कि यदि कामगारों की जंग को लंबा खींच दिया जाये! तो इनकी आर्थिक परिस्थतियाँ इन्हें मजबूर कर देंगी और संघर्ष की उर्जा स्वतः ही खत्म हो जाएगी। तब उनकी मजबूरी का लाभ उठा कर उनसे मनमानी समझौता कराया जा सकता है। चूँकि राज्य सरकार को पूंजीपतियों से उन्हें अपने राज्यों में पूंजी इन्वेस्टमेंट करा के नये उद्योग खुलवाने का स्वार्थ रहता है, इस लिए उनका पूंजीपति के प्रति झुकाव सदैव बना रहता है। ●जीवाजी राव कॉटन मिल को जब 28 अप्रैल 1992 को बन्द किया गया था, तब तत्कालीन सुंदर लाल पटवा की बीजेपी सरकार ने ही विद्युत विल के बकाया का बहाना ले कर मिल का विद्युत प्रवाह विच्छेद करा के अप्रत्यक्ष रूप से जे.सी.मिल्स प्रबंधन की मिल बन्दीकरण की योजना को मूर्तरूप दिया था और 8600 कामगारों का रोजगार एक झटके में समाप्त कर, कामगारों को उनके हाल पर छोड़ दिया था। आज मिल बन्दीकरण के 31 वर्ष पूरे हो रहे हैं, लगभग 35 से 40 फीसदी कामगार इस दुनिया से प्रस्थान कर चुके हैं, और उनके भुगतान का निराकरण सरकार सहित कोई भी आजतक नहीं करा पाया है। ●जे.सी.मिल्स प्रकरण 1992 से, श्रम न्यायालय, फिर औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (BIFR ),और इसके बाद 1997 से उच्चन्यायालय बेंच ग्वालियर के चक्रब्यूह में फँसा है। कामगार अपनी किस्मत को रो रहे हैं। 24 अप्रैल को उच्चन्यायालय बेंच ग्वालियर ने परिसमापक अधिकारी को 7.16 करोड़ रुपये की राशि कामगारों एवं अन्य बैंक आदि लेनदारों में 50 फीसदी के हिसाब से बांटने के निर्देश दिए हैं,और आने वाली 4 मई को जे.सी.मिल्स के स्वामित्व की भूमि और भवनों के विक्रय के लिए परिसमापक अधिकारी द्वारा दिये आवेदन पर सुनवाई होने जा रही है। ●यदि जे.सी.मिल्स ग्वालियर के परिसमापक अधिकारी, और यहाँ के प्रतिवादी पक्ष तथा सरकार के वकील चाहते! तो न्यायालय में विवादास्पद सरकारी लीज की जमीन के प्रकरण के पूर्व न्यायालय से कह सकते थे कि जेसीमिल्स के स्वयं की स्वामित्व की भूमि जो गैर विवादित है, उसको विक्रय किये जाने के आदेश पहले दिये जायें ! ताकि कामगारों एवं अन्य की देनदारियों को चुकता किया जा सके, लेकिन सभी ने सुनियोजित तौर पर मिल के सुलझे हुए पक्ष को दर किनारे करते हुए विवादित सरकारी लीज की भूमि के प्रकरण को प्राथमिकता दी। जिसके निराकरण में 20 वर्ष का समय बर्बाद हुआ। और घूम फिर कर अब गैर विवादास्पद जे.सी.मिल्स ग्वालियर की स्वयं की संपत्ति के विक्रय पर बात या गई, जहाँ से सुनवाई की सुरुआत करनी थी। ●ज्ञात हो वर्ष 2002 के वैल्युअर के अनुसार जे.सी.मिल्स लिमिटेड ग्वालियर के स्वयं के स्वामित्व की ग्वालियर शहर में 175 बीघा 06 विश्वा जमीन है। इसमे ग्वालियर के बिरला नगर क्षेत्र की 153 बीघा 09 विश्वा (31.755 हेक्टेयर) भूमि है, जिसमे 101 बीघा 09 विश्वा खुली भूमि (सड़क सहित), और 46 बीघा 18 विश्वा में आवास बने हैं। ●जे.सी.मिल्स के स्वयं के स्वामित्व की बिरला नगर क्षेत्र के अलावा ग्वालियर शहर में मुरार, जड़ेरुआ कला, मानपुरा गिर्द, अकबरपुर के विभिन्न 30 सर्वे नंबरों की 21 बीघा 14 विश्वा भूमि भी है, जिनकी रजिस्ट्री तो है किन्तु नामांतरण नहीं है। ◆सरकारी भूमि के सर्वे नंबरों के बीच लाईन न.2 के सर्वे नंबर 572 की 05 बीघा 02 विश्वा गैर आवासीय भूमि भी जे.सी.मिल्स के स्वामित्व में शामिल है। वैल्युअर ने जे.सी.मिल्स के स्वयं के स्वामित्व की भूमि के ब्यौरे का यही रिकॉर्ड माननीय उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया था। जिसमे उसने अतिक्रमण की गई भूमि का भी उल्लेख किया है, जो इस प्रकार है- 1◆ लाइन न.9 के बाद और 50 क्वाटर के पास की 1 बीघा 3 विश्वा भूमि पर ऊर्जा विभाग ने अपना विद्युत सब स्टेशन बना लिया है। 2● सर्वे नंबर 129 से 135 की 1 बीघा 01विश्वा खुली भूमि और 14 विश्वा गैर ब्यवसाई जमीन जेसीमिल्स के स्वामित्व की है, जिसमे अशोक टाकीज चलती थी,इसका विक्रय किया जा चुका है। 3◆क्षेत्र रसूलाबाद में लाईन न.9 के पीछे की 19 सर्वे नंबरों की 5 बीघा 10 विश्वा भूमि अतिक्रमित है। इस भूमि पर कई ब्यक्तियों ने अतिक्रमण कर मकान बना लिए है, इनके विरुद्ध न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है। 4● क्षेत्र रेशिम विहार जमादार क्वाटर्स और स्टाफ क्वाटर्स की 6 सर्वे नंबरों की 7 बीघा 12 विश्वा भूमि भी जे.सी.मिल्स के स्वयं की है, जिसका उपयोग ग्रेशिम ग्वालियर द्वारा किया जा रहा था। 5◆*लाईन न.3 में तिराहे के पास जे.सी.मिल्स की भूमि के सर्वे नंबर 344 में 10 विश्वा भूमि पर ग्रेसिम रिटेल शॉप बनी है।* 6● जे.सी.मिल्स की सर्वे नंबर 81,82,86 से 90, 344 की 12 बीघा 02 विश्वा मनोरंजनालय एवं वाचनालय की भूमि पर अब सरकार ने नया पार्क बनाया है और शेष खुली भूमि पर आडिटोरियम, फ़ुब्बारा बन रहा है, और नवीन लाइब्रेरी बनाये जाने की योजना है। 7★ मिल परिसर के अंदर सर्वे नंबर 419 से 426 तक 358,359,344,384, 392, 393 की 18 बीघा 01 विश्वा भूमि में 14 बीघा 08 विश्वा आवासीय रकबा और 03 बीघा, 13 विश्वा खुली भूमि है। 8● जे.सी.मिल्स की लाईन न.13 और 14 के बीच से लाईन न.8-A तक के सर्वे नंबर 73, 74, 76, 78, 103,111,112,113, 104 की 05 बीघा 03 विश्वा खुली भूमि में सड़क निर्माण है। 9● लाईन न.9,11,13 के पीछे रसूलाबाद, अशोक टाकीज के पास के सर्वे नंबर- 23,56 से 60 तक,106,107,122 से 127 तक,129 से 137 तक 147 की 05 बीघा 10 विश्वा पर अनेक लोगों के अतिक्रमण हैं, प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं। 10◆ जती की लाईन सर्वे नंबर 374 की 01 बीघा 10 विश्वा खुली भूमि की रजिस्ट्री जे.सी.मिल्स के नाम है, इसपर किसी अन्य ब्यक्ति ने प्रकरण चला कर जमीन अपने नाम कर ली है, इसपर अपील शासकीय समापक द्वारा की जानी थी। 11● जे.सी.मिल्स के स्वामित्व की बिरला नगर क्षेत्र के अलावा ग्वालियर शहर में मुरार, जड़ेरुआ कला, मानपुरा गिर्द, अकबरपुर के विभिन्न 30 सर्वे नंबरों की 21 बीघा 14 विश्वा भूमि भी है, जिनकी रजिस्ट्री तो है किन्तु नामांतरण नहीं है। 12● जे.सी.मिल्स की विभिन्न सर्वे नंबरों की 25 बीघा 65 विश्वा भूमि पर लाईन नंबर 3, 4, 5, 6, 9, 10, 11, 12, 13, 14 में 1102 भवन बने हैं, जिसके 118 भवन में ग्रेसिम ग्वालियर के मजदूर/कर्मचारी निवास कर रहे हैं। 13● सर्वे नंबर 332 से 344 तक लाईन न.3 की कुल 20 बीघा 19 विश्वा भूमि है, इसमे मात्र 06 बीघा आवासीय भूमि है,1 बीघा 13 विश्वा गैर आवासीय जिसमे मंदिर आदि है, और शेष 13 बीघा 06 विश्वा में लगभग 3.6 बीघा में सड़क, लगभग 3 बीघा में 100 से अधिक बृक्ष, शेष 8 बीघा में नगर निगम का कब्जा है। इसमे आंगनवाड़ी केंद्र, महिला जिम, दो चिल्ड्रेन पार्क कमेटी हाल बनाये गए है, और बकायदा दीवाल में लिखा है कि यह संपत्ति नगरनिगम ग्वालियर की है। 14◆ लाईन नंबर 4 में सर्वे नंबर 277 से 282 तक कुल 18 बीघा 13 विश्वा भूमि है, इसमे 2 बीघा 14 विश्वा भूमि में भवन बने हैं, लगभग 2-3 बीघा में सड़क 03 विश्वा गैर आवासीय (मंदिर, स्कूल) और 11 बीघा 16 विश्वा खुली भूमि है, जो अतिक्रमण और नगर निगम के कब्जे में आ गई है। 15● शेष लाईन न.5 से 14 तक लगभग 17 बीघा आवासीय भूमि है,इसमे सड़क और मंदिर की भूमि के अतिरिक्त शेष में अतिक्रमण है। *इस प्रकार जेसीमिल्स के स्वयं के स्वामित्व की जिला ग्वालियर में गोशपुरा की 153.09 बीघा, जड़ेरुआ कला की 17.15 बीघा, मानपुर गिर्द की 02.04 बीघा, अकबरपुर की 01.15 बीघा मिला कर कुल 175.06 बीघा भूमि और ग्वालियर के बाहर भटिंडा, कोलकता, मुम्बई, फतेहाबाद में 12 एकड़ 01 केनाल, 13 मरलास भूमि है। शासकीय परिसमापक , राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादी पक्ष चाहते ! तो इस भूमि की नीलामी अब से 20 वर्ष पूर्व हो जाती और कामगारों तथा अन्य का भुगतान चुकता हो गया होता! लेकिन होना तो वही है जिसमे पूंजीपति का हित हो!



