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पांच सालों के दौरान मुंबई में दोगुने से ज्यादा हुए टीबी के मरीज

देश की आर्थिक प्रगति में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले मुंबई शहर का देश के कुल टीबी मामलों में भी बड़ा हिस्सा है। टीबी के मामले हालांकि पूरे शहर से दर्ज किए जाते हैं लेकिन घाटकोपर, दादर, मलाड और गोवंडी जैसे क्षेत्रों में टीबी का प्रसार कमोबेश अधिक है। इनमें से घाटकोपर सबसे ऊपर है और अधिकांश टीबी मामले यहीं से सामने आते हैं।

टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित

भारत सरकार ने 2025 तक टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। बीएमसी स्वास्थ्य विभाग भी सतत जांच और उपचार पर बल दे रहा है लेकिन इसके बावजूद शहर में इस रोग के हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पिछले 5 वर्षों में लगातार टीबी के मामले सामने आ रहे हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी के अनुसार मुंबई में घाटकोपर, मलाड, दादर, और गोवंडी ऐसे क्षेत्र हैं जहां वर्ष दर वर्ष कई हस्तक्षेपों के बाद भी बड़ी संख्या में मामले सामने आ रहे हैं।

पिछले वर्ष के मुकाबले 4 से 14 फीसदी तक बढ़ोतरी

पिछले पांच साल में घाटकोपर में टीबी के रोगियों की संख्या में 147 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2017 में टीबी के 1406 मामलों के मुकाबले 2020 में यहां 3416 नए मामले पाए गए। दादर में इस रोग में 127 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। यहां 2017 में 1823 नए मामले सामने थे जबकि पिछले वर्ष 4147 मामले पाए आए। मलाड वार्ड में नए मामलों में 83 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। यहां रोगियों की संख्या 2210 से बढ़कर 2022 में 4055 हो गई। इस बीच गोवंडी में नए मामलों में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यहां 2017 में 2253 रोगियों की संख्या 2022 में बढ़कर 3115 हो गई। अगर पिछले एक वर्ष की बात की जाए तो 2021 के मुकाबले 2022 में एक वर्ष के दौरान टीबी के मामलों में अलग-अलग क्षेत्रों में 4 से 14 फीसदी की वृद्धि हुई है।

भीड़भाड़ और स्वच्छता नहीं होने से बढ़ा टीबी का प्रसार

बीएमसी के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि इनमें से 4 वार्डों में बेहद घनी झुग्गियां हैं और खुला स्थान नहीं है। इससे लोग बैक्टीरिया के संक्रमण का शिकार बन रहे हैं। बीएमसी टीबी की जांच पर अधिक ध्यान दे रही है, इसलिए स्वाभाविक रूप से हमें और मामले मिलेंगे और मामलों की संख्या बढ़ सकती है। नगरपालिका संचालित राजावाड़ी अस्पताल में अधीक्षक और बीएमसी परिधीय अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विद्या ठाकुर ने बताया कि अधिक जनसंख्या और लोगों द्वारा एहतियात नहीं बरतने और स्वच्छता के अभाव के कारण यह बीमारी फैल रही है। नए मामलों में बढ़ोतरी के बीच टीबी से जंग के मोर्चे पर आशाजनक खबर भी है। पिछले वर्ष की तुलना में टीबी से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या घटी है।

 

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