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भारतीय संस्कृति के बढ़ते प्रभाव को रोकने की कोशिश धीरेंद्र शास्त्री प्रकरण।

हिन्दुत्व परंपरा से चलता आया हुआ विचार है,इसको लेकर अनेक भ्रम खड़े किए गए है,लेकिन इस प्रचार के भ्रमजाल से हटकर हम देखेंगे तो पायेंगे कि यह तो सबका माना हुआ सर्वसम्मत विचार है।दुर्भाग्य यह है कि सारे विश्व को बंधुत्व की भावना से जोड़ने वाले विचार को समय समय पर षड्यंत्रों से होकर गुजरना पड़ता है।अभी हाल ही में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को भी इसी वजह से निशाने पर लिया गया है,विविधता में एकता, समन्वय,त्याग,संयम,कृतज्ञता जैसे मूल्य समुच्चय को जिस तरह से प्रसारित करने का कार्य छोटी सी आयु में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने किया और उसे जनता ने जिस तरह से स्वीकार किया उससे तथाकथित शक्तियों को चिढ़ होना स्वाभाविक भी है।अपनी कथाओं के माध्यम से जिस तरह जनमानस को जागरूक कर प्रभु श्री राम के चरित्र से जोड़ने का काम धीरेंद्र शास्त्री ने किया है,उससे वह निशाने पर है।जिनके पास स्वयं का कोई साक्ष्य मौजूद नही आधार हीन बातो से भ्रम फैलाना जिनकी नियति है, वह एक बार फिर धीरेंद्र शास्त्री जी से साक्ष्य मांग रहे है। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सदैव अवसरो की तलाश में रहने वाले गिरोह सक्रिय हो गए है।यह कोई पहली बार हो रहा हो ऐसा नही है,यह तो समय समय पर होता आया है। भारतीय अर्थात वैदिक ज्ञान परंपरा और जीवन पद्धति की चर्चा होती है,तब वह सामान्यत: अध्यात्म,धर्म,आत्ममुक्ति, कर्मकांड,पूजा पाठ तक सीमित रहती है,यह माना जाता है,परंतु वर्तमान परिवेश में सारे विश्व को एक सूत्र में बांधने का मंत्र,दिशा देने और नेतृत्व की कुशलता जिस तरह से दिखाई दी है,उससे स्वाभाविक रूप से कतिपय लोगो को कष्ट होगा।पहले परकीय सत्ता और बाद में उनके द्वारा पोषित आधुनिक बुद्धिजीवियों ने भारतीय दर्शन हिन्दुत्व के विचार को गलत रूप से परिभाषित कर भ्रम उत्पन्न कर जो टकराव की परिस्तिथिया उत्पन्न की है,वही बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को निशाने पर लेकर पुनः दिख रही है।यह कोई नया नही है। अंग्रेजो के सत्ताकाल में और स्वतंत्रता के पश्चात जो विश्वविद्यालय भारत में खुले वे आधुनिक ज्ञान के नाम पर पाश्चात्य ज्ञान परोसते रहे है।इससे भारतीय ज्ञान विज्ञान की परंपरा को भारी नुकसान हुआ और राष्ट्र की जरूरतें, शाश्वत जीवन मूल्य,नैतिक आचरण,समाज से जुड़ाव जैसी बाते छूटती गई।नही तो आदिकाल से संत महात्मा ही हमारी मान्यताओं के आधार हुआ करते थे,जगत के कल्याण का आदर्श गुरुकुल के माध्यम से स्थापित किया करते थे,वही दिशा देकर व्यक्ति निर्माण किया करते थे।पर आधी रात में संतो के आश्रमों पर बल पूर्वक की गई कार्यवाही हो या भारतीय मान बिंदुओं पर होने वाले आक्रमण समय समय पर इसको भोगा,मूलभूत तत्वों को दृष्टि से ओझल होते भी देखा ।परंतु आज जब भारतीय संस्कृति के प्रभावी रूप को देश के बढ़ते कदमों के रूप में सभी देख पा रहे है,भारत की शक्ति का एहसास पूरा विश्व कर पा रहा है,तब घर के अंदर से ही दुष्प्रचार,धार्मिक आस्था के केंद्रों को निशाने पर लेना,मान्यताओं पर कुठाराघात करके किसी भी तरह से राह में बाधा उत्पन्न करना यह सोची समझी चाले भी दिख ही रही है।वास्तविकता में इसके पीछे वही शक्तियां है जो समस्त संस्थानों पर काबिज होकर हर हाल में अपना एजेंडा स्थापित करना चाहती है,भारतीय दर्शन और मूल्यों से विमुख कर ओपनिवेशकता को बढ़ाना चाहती है।इसके माध्यम से केवल एक व्यक्ति को विवादो के घेरे में लेना भर नही है,संत महात्माओं के माध्यम से संस्कृति को आहत करना मूल में है।अभी हाल ही में जो कुछ एक मामलो से कतिपय व्यक्तियों के आचरण से सम्पूर्ण व्यवस्था को बदनाम करने का जो अवसर प्राप्त हुआ है,उससे जानबूझकर संभ्रम निर्माण करने की कोशिशें जारी है।जिस गति से भारतीय जीवन दर्शन ने समूचे विश्व को अपनी और खींचकर अशांति के दौर में शांति का संदेश प्रदान किया है,उसी गति से भारत में मूल्यों को स्थापित करने वाले केंद्रों पर आक्रमण भी बढ़े है। बागेश्वर धाम भी इसी षड्यंत्र का एक हिस्सा है,जिस जिस धार्मिक स्थान पर धर्मावलंबीयो की संख्या में वृद्धि होगी या मान्यताओं को प्रचारित करने में, वैश्विक ध्यान आकृष्ट करने में जो सफल होंगे, वह संत महात्मा तथाकथित बुद्धिजीवियों के निशाने पर होंगे।लेकिन इस दौर में भी इन नए हथकंडों से भी,विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाली सभ्यता विचार को पुष्टता प्राप्त होगी यह तय है।जो भी अच्छा कार्य करेगा उसे दुष्प्रचारो के माध्यम से रोक पाना संभव नही है, क्यूंकि हम जिसको हिन्दुत्व कहते है इस मूल्यबोध,उससे निकली यह संस्कृति अपने घटक देशभक्ति के बढ़ते स्वरूप में दिखाई देती है,हमारे संत महात्मा इस बढ़ते स्वरूप के आधार बने हुए है।जिन्हे रोक पाना संभव नही है।ये संस्कृति से ओतप्रोत आधुनिक भारत की आहट है,जो विश्व का नेतृत्व करने के लिए तैयार है,अर्थात विश्व शांति के उपदेश के साथ बंधुत्व की भावना को स्थापित करने वाला है। लेखक आशुतोष शर्मा पुर्णायन गणेश कॉलोनी विष्णु मंदिर के पीछे शिवपुरी 8770317240 9425430464

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