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ग्वालियर। सरस्वती नगर थाटीपुर में अल्ट्रासांउड मशीन के द्वारा गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण करने के आरोप में आरोपीगण को सजा।

ग्वालियर। कलेक्टर जिला ग्वालियर को गोपनीय सूचना प्राप्त हुई कि सरस्वती नगर यूनिवर्सिटी रोड़ थाटीपुर पर अल्ट्रासांउड मशीन के द्वारा गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण किया जाता है। तत्कालीन कलेक्टर ग्वालियर द्वारा आरोपी को पकड़ने हेतु स्टिंग ऑपरेशन हेतु दल का गठन किया। जिसमें गर्भवती महिला द्वारा स्वेच्छा पूर्वक डिकोय विटनिस के रूप में शामिल होने हेतु सहमति प्रदान की। सम्पूर्ण कार्यवाही का पर्यवेक्षण तत्कालीन नायब तहसीलदार श्रीमती प्रतिभा डेगुला, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास श्री राम कुमार तिवारी, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास श्री राहुल पाठक द्वारा किया गया। डिकोय विटनिस द्वारा नर्स प्रियंका को 8500/-रू प्रदान किये इसके बाद गोपनीय कार्यवाही 22.04.2014 को प्रारंभ कि गई। दल के सदस्य द्वारा गर्भवस्थ शिशू के लिंग परीक्षण हेतु दिनांक 22.04.2014 को संपर्क किया। नर्स प्रियंका द्वारा बताया कि वह किसी डॉक्टर से लिंग परीक्षण करा सकती है और वह दो दिन बाद आने को कहा। इसके बाद दिनांक 25.04.2014 को सुबह 10ः30 बजे मुरार थाने के पास नर्स प्रियंका ने डॉक्टर से बात कर उसे दो घंटे के बाद मुरार थाने के पास मिलने को कहा। सूचना प्राप्त होने पर तहसीलदार श्रीमती प्रतिभा डेगुला को सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास श्री राम कुमार तिवारी, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास श्री राहुल पाठक डिकोय विटनिस के साथ मौके पर पहुचे जहॉ प्रियंका पूर्व से मैजूद थी। प्रियंका ने डिकोय से 8500रू प्राप्त किये और एक अन्य व्यक्ति महिला डिकोय और महिला अधिकारी लक्ष्मी तोमर को सरस्वती नगर ले गये जहॉं पर कपिल पाण्डेय नाम के व्यक्ति ने अल्ट्रासांउड मशीन से गर्भवती डिकोय के पेट का परीक्षण कर लिंग की पहचान करायी। स्टिंग पूर्ण होने पर थाटीपूर पेट्रोल पम्प के पास डिकोय एवं सहयोगी महिला अधिकारी की शिनाख्तगी के आधार पर दो लड़को को हिरासत में लिया गया व उनसे मोबाइल व धनराशी की जप्ती की गई हिरासत में लिये गये। इसके बाद दल के सदस्य लिंग परीक्षण करने वाले स्थान पर पहॅुचे जहॉं डिकोय एवं सहयोगी अधिकारी ने बताया कि कपिल पाण्डेय ने ही अल्ट्रासांउड मशीन से लिंग परीक्षण किया है इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर डॉक्टर प्रभात कौशल प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा डॉक्टर बिन्दु सिंघल जिला कुष्ट अधिकारी एवं नॉडल अधिकारी भी मौके पर पहॅुचे, जॉच दल द्वारा सुक्ष्म रूप से जॉच प्रारंभ की गई तलासी में लैपटॉप, पोर्टेबल अल्ट्रासांउड मशीन, युएसजी लॉसन, बीपी मशीन, मोबाईल, नगद रूपये, रिबॉल्बर एवं अन्य सामग्री जप्त कर अन्य कार्यवाही पूर्ण की गई। जॉंच मेे पाया की आरोपी कपिल पाण्डेय ने अन्य आरोपीगण के साथ संलिप्त होकर गर्भवती महिलाओं को लाने पर उनकी अवैधानिक अल्ट्रासांउड मशीन से अनाधिकृत रूप से गर्भवस्थ शिशू का लिंग परीक्षण करता है तथा उक्त अल्ट्रासांउड केन्द्र पर आवश्यक अभिलेख न रखते हुये अनियमितताएं बरतता है। सम्पूर्ण जॉंच में अनियमितता व अधिनियम व नियम का उल्लंघन पाये जाने पर जिला मजिस्ट्रेट जिला ग्वालियर के आदेश के द्वारा कपिल पाण्डेय एवं उसके साथ गर्भवस्थ शिशू के लिंग परीक्षण में श्रीमती प्रियंका नरवरिया व दो अन्य के विरूद्ध मुख्य चिकित्सा एवं स्वस्थ्य अधिकारी के द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया गया। सम्पूर्ण विचारण एवं साक्ष्य के आधार पर उक्त प्रकरण में कपिल पाण्डेय एवं श्रीमती प्रियंका नरवरिया को दोषसिद्ध पाया गया। उक्त मामले का विचारण विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमान महेन्द्र सैनी के न्यायालय में किया गया। पैरवीकर्ता अभियोजन अधिकारी श्री अभिषेक सिरौठिया द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया उक्त अपराध समाज के प्रति गंभीर अपराध है साथ ही कन्या भ्रूण हत्या जेसे जघन्य अपराध के प्रोत्साहित करने वाला है माननीय न्यायालय द्वारा भी अपने निर्णय में लेख किया है कि भारतीय परिवेश में आज भी कन्या जो कि समाज का अभिन्न अंग है जिसके बिना एक सभ्य समाज कि कल्पना नहीं कि जा सकती है। सम्पूर्ण विचारण एवं साक्ष्य के आधार पर आरोपी कपिल पाण्डेय को धारा 3(1) व 18(1) सहपठित धारा 23(1) में एक वर्ष सश्रम कारावास व 5000रू अर्थदण्ड, धारा 6(ख) सहपठित धारा 23(1) में दो वर्ष सश्रम कारावास व 5000रू अर्थदण्ड, धारा 5(2)सहपठित धारा 23(1) में दो वर्ष सश्रम कारावास व 5000रू अर्थदण्ड, धारा 29(1) सहपठित धारा 23(1) में एक वर्ष सश्रम कारावास व 5000रू अर्थदण्ड व आरोपी श्रीमती प्रियंका नरवरिया को धारा 6(ख) सहपठित धारा 23(1) में एक वर्ष सश्रम कारावास व 2000रू अर्थदण्ड, धारा 3(3) सहपठित धारा 23(1) में एक वर्ष सश्रम कारावास व 2000रू अर्थदण्ड के दण्ड से दण्डित किया। शासन की ओर से उक्त प्रकरण में पैरवी अभियोजन अधिकारी श्री अभिषेक सिरौठिया द्वारा की गयी। अभिषेक सिरौठिया एडीपीओ ग्वालियर

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