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ग्वालियर

ग्वालियर बना नशें का सबसे बड़ा गढ़ l

ग्वालियर में ग्वालियर के तीनों उपनगरों सहित ग्रामीण अंचल में अब नशे का कारोबार करने वालों ने अपनी जड़ें जमा ली हैं, इनकी जड़ें इतनी गहराई तक पहुंच गई हैं और अब यह डिमांड के मुताबिक सप्लाई करने लगे हैं। इनके पास कौन सा नशा नहीं है। गांजा मांगोगे तो गांजा मिल जाएगा, हेरोइन की तलबगार को हेरोईन की पुडिय़ा हाजिर करा देंगे। ग्वालियर में लगातार हो रहे नशे की बरादमगी इशारा करती है कि नशे का यह खेल अच्छी तरह से फल-फूल रहा है। पुलिस नशे के तस्करों को तो पकड़ लेती है पर जड़ों को इसलिए नहीं काट पा रही है क्योंकि यह ग्वालियर से सैकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर बैठे हैं और वहां जाकर एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई करना कोई हंसी-खेल नहीं है। बढ़ती डिमांड पिछले कुछ समय में ग्वालियर-चंबल अंचल में ड्रग तस्करी के मामलों की संख्या में एकदम से उछाल आया है। जाहिर है जब ड्रग आ रही है तो उसकी खपत भी उसी अनुपात में बढ़ रही है, अभी तक गांजा, चरस, स्मैक फूंकने वाले अब ब्राउन शुगर, एमडीएमए और हेरोइन की ओर बढ़ गए हैं। पिछले कुछ महीने में एक सैकड़ा से ज्यादा ड्रग तस्कर पुलिस ने पकड़े हैं। साढ़े 4 करोड़ का नशा बरामद पुलिस ने इस साल तस्करों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर 69 तस्करों को पकड़कर उनसे 4 करोड़ 49 लाख, 83 हजार 800 रुपए का नशा बरामद किया है, जिसमें शराब, गांजा, स्मैक के साथ ही एमडीएमए और हेरोइन पकड़ी है। पुलिस पकड़ में आए तस्करों में ज्यादा संख्या नशे की सप्लाई करने वाले लगे हैं, जबकि बड़े आरोपी हाथ नहीं आए हैं। पुलिस की आंखें बंद शहर में तेजी से क्लब कल्चर बढ़ रहा है। पब, क्लब व हुक्काबार खुलते जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि पुलिस को इनकी भनक नहीं है। पुलिस को भनक तो है पर पुलिस का हाथ भी इन सबको चलाने वालों के सिर पर है। इसलिए जब ऊपर से डंडा चलता है तभी पुलिस कुछ पर डंडा चलाकर कार्रवाई पूरी करने की रस्म अदा कर देती है और इसके कुछ दिनों बाद सब कुछ पुरानी पटरी पर लौट आता है। बड़ेे शहरों से जुड़े तार पहले शहर में नशे की सप्लाई करने वालों का नेटवर्क इटावा-मैनपुरी के स्मैक माफिया तक रहता था, लेकिन पिछले कुछ महीने में पकड़ी गई हाई प्रोफाइल ड्रग्स के बाद यह भी खुलासा हुआ है कि इन ठगों का नेटवर्क बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुम्बई व गोवा तक पहुंच गया है। दो महीने पहले पकड़ी गई एमडीएमए ड्रग के मामले में नाइजीरियन गैंग की आशंका भी सामने आई थी, टीम के गोवा से तार जुड़ेे थे। अब हेरोइन ड्रग पकड़ी है इसको फिलहाल इटावा यूपी से लाना बता रहे हैं, लेकिन वहां से जिसने यह नशे के सौदागरों को दी उसकी लिंक किसी बड़े शहर से ही होगी। इसमें खतरा कम पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में जितने भी ड्रग के बड़ेे रैकेट पकड़े हैं, उनमें पकड़े गए नशे के सौदागरों का लूट, डकैत, हथियारों की तस्करी का पुराना रिकॉर्ड रहा है। पर जैसे-जैसे ग्वालियर नशे का गढ़ बनता जा रहा है। बदमाशों ने बदमाशी छोड़कर नशे की सप्लाई में हाथ अजमाना शुरू कर दिया है। इसमें रिस्क कम होती है और मुनाफा ज्यादा होता है। जब तक पकड़ेे नहीं जाते हैं कोई अपराध दर्ज भी नहीं होता है। मोटा है मुनाफा ग्वालियर क्राइम ब्रांच के एएसपी राजेश डंडौतिया ने बताया कि लगातार पुलिस नशे के सौदागरों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। पुलिस का फोकस पुडिय़ा बेचने वाले से बाहर के शहरों से यहां नशा सामग्री लाने वाले हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि नशे की फील्ड में कम लागत में ज्यादा मुनाफा होता है। यही कारण है कि तस्कर यहां का रूख करने लगे हैं, लेकिन ग्वालियर पुलिस ने उनके अंदर खौफ पैदा कर दिया है, लगातार नशे के खिलाफ कार्रवाई जारी है।

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