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उत्तरप्रदेश

3 करोड़ उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी, फॉल्ट और बिल सुधार के कोई काम नहीं होंगे

लखनऊ: यूपी में तीन करोड़ उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। 25 हजार से ज्यादा इंजीनियर और कर्मचारी मंगलवार से कार्य बहिष्कार पर चले गए है। इस दौरान बिजली से संबंधित कोई भी काम नहीं होगा। इसमें बिजली सुधार, फॉल्ट हो या नए कनेक्शन लेने की बात हो कोई भी काम इंजीनियर नहीं करेंगे।अभियंताओं ने सोमवार को पावर कॉर्पोरेशन के आला अधिकारियों के साथ बैठक किया लेकिन उसका कोई हल नहीं निकला। ऐसे में कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार पर जाने का फैसला किया। अभियंता संघ के अध्यक्ष राजीव सिंह और महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने जारी बयान में कहा कि ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन के पक्षपातपूर्ण, अलोकतांत्रिक, स्वेच्छाचारी, दमनकारी, नकारात्मक और विद्वेषपूर्ण रवैये के कारण ऊर्जा निगमों की गिरती परफॉर्मेंस, बढ़ती नकारात्मक एवं अव्यवहारिक लक्ष्यों को प्राप्त करने का अत्यधिक दबाव व मानसिक तनाव देने वाली कार्यप्रणाली के साथ काम किया जाता है।प्रमुख मांग9 वर्ष, कुल 14 वर्ष एवं कुल 19 वर्ष की सेवा के बाद तीन प्रमोशन वेतनमान दिया जाए।निर्धारित चयन प्रक्रिया के अन्तर्गत चेयरमैन, प्रबन्ध निदेशकों व निदेशकों के पदों पर चयन किया जाएसभी बिजली कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाएट्रांसफार्मर वर्कशॉप के निजीकरण के आदेश वापस लिए जाए765/400/220 केवी विद्युत उपकेन्द्रों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से चलाने का निर्णय रद्द किया जाएपारेषण में जारी निजीकरण प्रक्रिया निरस्त की जाएआगरा फ्रेंचाईजी व ग्रेटर नोएडा का निजीकरण रद्द किया जाएऊर्जा कर्मियों की सुरक्षा के लिए पावर सेक्टर इम्प्लॉइज प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाएतेलंगाना, पंजाब, दिल्ली व उड़ीसा सरकार के आदेश की भांति ऊर्जा निगमों के समस्त संविदा कर्मियों को नियमित किया जाएबिजली कर्मियों को कई वर्षों से लम्बित बोनस का भुगतान किया जाएभ्रष्टाचार एवं फिजूलखर्ची रोकने हेतु लगभग 25 हजार करोड़ के मीटर खरीद के आदेश रद्द किए जाए व कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर की जाए

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