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श्रीमद भागवत कथा ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने आई है साध्वी आस्था भारती
परमात्मा की भक्ति रूपी सुरक्षा कवच के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता – साध्वी आस्था भारती दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा 21 से 27 नवंबर 2022 तक एम.बी. इंटर कॉलेज ग्राउंड, नैनीताल रोड, बरेली, उत्तर प्रदेश में श्रीमद भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा के प्रथम दिवस गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी आस्था भारती जी ने बताया कि भागवत कथा का मुख्य पात्र हैं- परीक्षित। मृत्यु की आहट को सुनकर वे सजग व सतर्क होकर अपनी मृत्यु को सँवारने के लिए प्रयासरत हो गए। 9/11 अमेरिका पर हुआ आतंकी हमला हो या निपाह वायरस हमले जैसी विभीषिकाएं, सुनामी हो या भूकंप, या हो कोरोना जैसी महामारी- ये सभी warning alarms हैं कि संसार की समस्त विद्या व शक्ति की भी सीमाएं हैं। Medical insurance, Gratuity Schemes, Security systems, Antivirus आदि सुरक्षा कवच हमारे शरीर व भौतिक संसाधनों को बचाने के प्रयास हैं। पर अवश्यम्भावी मृत्यु या Crisis से हमें इनमें से कोई भी नहीं बचा सकता। परीक्षित, अल्फ्रेड नोबेल आदि मृत्यु की परछाई को देखकर जाग गए। अपनी मृत्यु को सजाने व जीवन को सफल-सुंदर बनाने में जुट गए। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन को जीते हुए भी परेशानियों का उत्तम समाधान देती है और जीवन के बाद भी मोक्ष को सुनिश्चित करती है। परमात्मा की भक्ति रूपी सुरक्षा कवच के प्रति हम कब जागरूक होंगे। भागवत कथा के श्रवण से धुन्धुकारी की सात गाँठों का टूटना, हमारे पूर्वाग्रहों और भ्रमों की गाठों के टूटने का प्रतीक हैं। प्रकाश के अभाव में आज मानव समाज अज्ञानता के अंधकार में घिरकर पतन की ओर बढ़ रहा है। We are blind and headed towards darkness because we don’t see the TRUE LIGHT (God). सद्गुणों को आप किसी curriculum में पढ़ाकर समाज में या बच्चों में रोपित नहीं कर सकते, इसके लिए शिक्षा के साथ दीक्षा की भी आवश्यकता है। समाज में शिक्षा के वास्तविक अर्थ को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से वैदिक शिक्षा से प्रेरित ‘मंथन’ कार्यक्रम की नींव रखी गई। मंथन का यह अटल विश्वास है कि शिक्षा-दीक्षा के अनुपम संगम से हमारे राष्ट्र की ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व की रीढ़ की हड्डी मजबूत होगी। मंथन उन बच्चों तक शिक्षा पहुँचाने में कार्यरत है जो या तो शिक्षा से वंचित है या परिस्थितियों का शिकार हो शिक्षा से नाता तोड़ने की कगार पर खड़े हैं। एक सुशिक्षित और सभ्य समाज- यही मंथन का ध्येय है।






