एक ही शिक्षा सत्र में ले सकेंगे दो डिग्री, CSVTU का JNTU हैदराबाद से कॉन्ट्रैक्ट

दुर्ग: नए पैटर्न पर कोर्स के लिए विश्वविद्यालय में बुलाई गई बैठकछत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) के विद्यार्थी अब एक ही शिक्षा सत्र में दो दो डिग्री कोर्स कर सकेंगे। इसके लिए CSVTU और JNTU हैदराबाद के बीच अनुबंध होने वाला है। सबसे पहले यह प्रयोग बीटेक के साथ डाटा एनालिसिस में बीबीए के कोर्स के लिए होगा। यह दोनों कोर्स एक स्टूडेंट्स एक सत्र में एक साथ कर सकेगा।जेएनटीयू हैदराबाद से किए गए अनुबंध से सीएसवीटीयू में पढ़ने वाले छात्रों को काफी फायदा होगा। वह एक ही सत्र में दो नियमित डिग्री के लिए एक साथ पंजीयन करा सकेंगे। इसका मतलब है कि छात्र बीटेक और बीबीए दोनों की पढ़ाई एक साथ कर सकेंगे।इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अप्रैल में नए नियम जारी करने के बाद सीएसवीटीयू के कुलपति डॉ. एमके वर्मा और जेएनटीयू के कुलपति डॉ. केएन रेड्डी ने एक ही शिक्षा सत्र में दो नियमित डिग्री कोर्स शुरू करने के लिए पहल की थी। इसके बाद उस पर अब अमल किया जा रहा है।छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालयइस कोर्स के शुरू होने से बीई के छात्र तकनीकी पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ-साथ प्रबंधन की पढ़ाई भी कर सकेंगे। इसकी शुरुआत सीएसवीटीयू में संचालित अध्ययन शालाओं में चलने वाले पाठ्यक्रम से की जाएगी। बाद में एफिलिएटेड महाविद्यालयों में संचालित बीई के पाठ्यक्रमों में जोड़ा जा सकेगा। इससे छात्रों को बेहतर रोजगार के अवसर मिलने की संभावना बनने की उम्मीद है। दोनों विश्वविद्यालयों के बीच अनुबंध हो जाने से बीई के छात्रों का क्रेडिट ट्रांसफर भी किया जा सकेगा। इसके लिए छात्रों के बीच विकल्प भी रखा जाएगा।हाइब्रिड मोड पर होगी पढ़ाईविश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि ऐसे कोर्स के लिए पढ़ाई हाइब्रिड मोड पर कराई जाएगी। हाइब्रिड यानि इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों क्लासेस होंगी। जेएनटीयू से 70 फीसदी कोर्स की पढ़ाई ऑनलाइन होगी तो वहीं सीएसवीटीयू से 30 फीसदी कोर्स की पढ़ाई ऑफलाइन होगी। नई शिक्षा नीति-2020 के तहत इस कोर्स को लागू किया जाएगा।नियमों में किया जाएगा परिवर्तनकुलसचिव डॉ. केके वर्मा ने बताया कि डबल डिग्री के लिए विशेषज्ञों की राय के अनुसार क्रियान्वयन किया जाएगा। इसके लिए अलग से रोड मैप तैयार किया जाएगा। पहल से नियम बनाकर विद्या परिषद की बैठक में रखा जाएगा। फिर कार्य परिषद में सभी सदस्यों की सहमति लेकर फैसला किया जाएगा। इसके बाद अंतिम मुहर के लिए राजभवन भेजा जाएगा। इसके बाद सीएसवीटीयू के अधिनियमों में परिवर्तन किया जाएगा।




