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पंजाब

हाईकोर्ट कभी भी सुना सकती है AAP की चुनावी याचिका पर फैसला

चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम मेयर की कुर्सी से जुड़ी चुनावी याचिका में कभी भी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट अपना फैसला दे सकता है। हाईकोर्ट ने जनवरी महीने में दायर इस याचिका पर अपना फैसला ‘रिजर्व’ रख लिया है। मेयर की कुर्सी पर भाजपा की सर्बजीत कौर हैं। आम आदमी पार्टी(AAP) ने 8 जनवरी को हुए मेयर चुनाव में धांधली के आरोप लगाए थे। सबसे ज्यादा पार्षद होने के बावजूद मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर भाजपा उम्मीदवार चुने गए थे। वोटों की गिनती में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए AAP ने हाउस में जबरदस्त प्रदर्शन किया था।भाजपा का मेयर बनने पर हाउस में शहर की सांसद किरण खेर की मौजूदगी में भारी हंगामा हुआ था। बड़ी मुश्किल से सर्बजीत कौर को मेयर की कुर्सी पर बिठाया जा सका था। इसके बाद AAP ने हाईकोर्ट का रुख किया था।भाजपा नेता सर्बजीत कौर जनवरी, 2022 में चंडीगढ़ की मेयर चुनी गई थी।इस मेयर चुनाव के परिणाम को गैरकानूनी करार देने की मांग करते हुए नगर निगम के स्टेट इलेक्शन कमिश्नर तथा अन्य प्रतिवादी पक्षों को पुनः ताजा चुनाव करवाने के आदेश जारी करने की मांग की गई थी। AAP पार्षद अंजू कत्याल, प्रेम लता तथा राम चंद्र यादव ने याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी। इसमें भाजपा की मेयर सर्बजीत कौर समेत सीनियर डिप्टी मेयर दिलिप शर्मा और डिप्टी मेयर अनूप गुप्ता के चुनाव को रद्द करने की मांग की गई थी। मेयर कार्यकाल 31 दिसंबर तक ही है। ऐसे में याचिका में फैसला यदि AAP के हक में भी आता है तो मेयर की कुर्सी पर अब कोई खास असर नहीं पड़ेगा।अंजू कत्याल थी मेयर पद की उम्मीदवारअंजू कत्याल AAP की तरफ से मेयर पद की उम्मीदवार थी। उनके अलावा प्रेम लता सीनियर डिप्टी मेयर और राम चंद्र यादव डिप्टी मेयर पद के उम्मीदवार थे। मामले में प्रिस्क्राइब्ड अथॉरिटी कम डिप्टी कमिश्नर कम डिवीज़नल कमिश्नर, चंडीगढ़ नगर निगम व अन्यों का पार्टी बनाया गया था। आरोप के मुताबिक भाजपा के दबाव में इसके उम्मीदवारों को विजयी बनाने के लिए चुनाव से जुड़े अधिकारियों ने गलत हथकंडे अपनाए। बीते 8 जनवरी को हुए मेयर चुनाव में गैरकानूनी ढंग से भाजपा पार्षदों को विजयी घोषित किया गया।आप संयोजक प्रेम गर्ग के मुताबिक चुनावी याचिका का जल्द निपटारा होना चाहिए था।AAP ने कहा कि दिसंबर, 2021 में हुए निगम चुनावों में आप 14 सीटें लेकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में आई थी। हालांकि मेयर चुनाव के दौरान हुई धांधली के चलते कम वोटों के बावजूद भाजपा के उम्मीदवार को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुन लिया गया। ऐसे में पुन: चुनाव की मांग की गई थी।जल्द निपटारा होना चाहिए था: AAPचंडीगढ़ आप संयोजक प्रेम गर्ग का कहना है कि चुनावी याचिका का जल्द निपटारा होना चाहिए था। बता दें कि द रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951 की धारा 86 चुनावी याचिका के ट्रायल के बारे में कहती है। इसके पॉइंट 7 में कहा गया है कि हर चुनावी याचिका पर जितनी जल्द हो सके उतनी तेजी से सुनवाई करनी चाहिए। इसका 6 महीने में निपटारा करने का प्रयास होना चाहिए।

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