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मुरैना में ‘जहर’ पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के ‘कवच’ बन गए हैं अधिकारी गुप्ता?
मुरैना। चंबल की धरती पर त्योहारों की मिठास कम और मिलावट का जहर ज्यादा घुल रहा है। हैरानी की बात यह है कि खाद्य विभाग की टीमें सड़कों पर तो दिखती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल 'सैंपल का खेल' खेला जा रहा है। शहर के गलियारों में चर्चा आम है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी अवनीश गुप्ता की 'विशेष कृपा' के चलते मिलावटखोरों की चांदी है। सवाल जो प्रशासन की नींद उड़ा देंगे: सस्पेंड होकर फिर मुरैना ही क्यों? बताया जा रहा है कि कई जगह से निलंबित होने के बाद साहब का मुरैना से ऐसा क्या अटूट लगाव है कि वे बार-बार यहीं लौट आते हैं? क्या यह कोई प्रशासनिक मजबूरी है या मिलावट के सिंडिकेट से कोई गहरी सांठगांठ? सैंपल या सिर्फ सेटिंग? त्यौहार आते ही विभाग सक्रिय होता है, फोटो खिंचवाता है और सैंपल भरता है। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी किसी बड़ी दुकान पर ताला क्यों नहीं लटकता? क्या ये सैंपल लैब जाने से पहले ही 'मैनेज' हो जाते हैं? सबका माल 'शुद्ध' कैसे? जब पूरी दुनिया जानती है कि त्योहारों पर दूध, मावा और पनीर में भारी मिलावट होती है, तब मुरैना खाद्य विभाग को सब कुछ 'जस का तस' और 'शुद्ध' क्यों नजर आता है? जनता का आक्रोश शहर की जनता अब इस दिखावे की कार्रवाई से ऊब चुकी है। अगर मिलावटखोरों पर नकेल नहीं कसी गई, तो यह स्पष्ट है कि विभाग जनता की सेहत से ज्यादा अपनी जेब भरने में दिलचस्पी रख रहा है। क्या कलेक्टर साहब इस 'पुराने प्रेम' और 'अजीब मेहरबानी' की जांच करेंगे? "साहब की मेहरबानी, जनता की जान पर भारी... अब तो जागिये प्रशासन!"



