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पंचायत सचिवों पर मोहन सरकार मेहरबान, 7 माह में तीसरा बड़ा फैसला, अब मिलेगा ये लाभ ।

भोपाल: सरकारी सेवक की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय किया है. अनुकंपा नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार ने नियमों पर बड़ा बदलाव किया है पंचायत सचिव के परिजनों को भी अब सामान्य कर्मचारियों के समान 7 साल तक अनुकंपा नियुक्ति मिल सकेगी. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने नवंबर 2017 में जारी की गई अनुकंपा नियुक्ति के पात्रता संबंधी नियमों में बदलाव किया है. ऐसे में यदि किसी पंचायत सचिव की असमय मृत्यु होने पर उसके आश्रित को 7 साल की समय सीमा में अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिल सकेगा. इसके पहले तक 3 साल की समय सीमा निर्धारित थी. अनुकंपा नियुक्ति की समय सीमा में बढ़ोत्तरी होने से आश्रित शिक्षा ग्रहण कर सकेगा. लंबे समय से उठा रही थी मांग त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई पंचायत में पदस्थ होने वाले सचिवों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने के मामले में लगातार सरकार द्वारा कदम उठाया जा रहा है. मार्च 2024 में प्रदेश की मोहन सरकार ने पंचायत सचिवों को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने के नियमों को सरल करने का फैसला किया था. विधानसभा चुनाव के दौरान बुलाई गई पंचायत में बीजेपी द्वारा इसका ऐलान किया गया था. अनुकंपा नियुक्ति का फैसला लेने के बाद सचिवों ने मांग उठाई थी कि दूसरे जिले में भी अनुकंपा दी जाए. इसके बाद राज्य सरकार ने ऐलान किया कि पंचायत सचिव के आश्रित को पास के जिलों में भी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिल सकेगा. कई मामलों में संबंधित जिले में पद खाली न होने से समस्या आ रही थी. इसके लिए सरकार ने पंचायत अधिनियम के नियम 5 के 5 क जोड़कर इसमें संशोधन किया था. मोहन यादव सरकार ने पंचायत सचिवों को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला किया है. अब पंचायत सचिवों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिए जाने की समय सीमा बढ़ा दी गई है. ऐसी स्थिति में आश्रित बालिग नहीं है या फिर निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नहीं है तो 7 साल के दौरान पढ़ाई कर सकेगा. इसके लिए पंचायत अधिनियम के नियम 5 क में प्रावधान किया गया है कि जिस जिले में पंचायत सचिव पदस्थ है, वहां की ग्राम पंचायतों में सचिव का पद खाली नहीं है तो परिजनों को अन्य जिलों में पंचायत सचिव के रिक्त पद पर नियुक्ति की जाएगी. इसके बाद उसे अनुकंपा का लाभ दिया जाएगा. उधर पंचायत सचिव संगठन ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है.

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