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ड्रीम 11 में रातों-रात करोड़पति बनने के चक्कर में कंगाल हो रही युवा पीढ़ी।
(राजवर्धन सिंह) शिवपुरी। ड्रीम 11 यह बहुत ही खतरनाक बीमारी के तौर पर उभर रही है। इस खेल पर समय रहते रोक लगानी होगी या फिर कोई और स्थाई समाधान ढूंढना होगा। अन्यथा वित्तीय जोखिम के साथ साथ मानसिक बीमारी के जन्म का कारण बनने लगा है। चूंकि ड्रीम 11 एक ऐसा खेल है जो 39 व 59 रुपए में युवाओं को रातों रात करोड़पति बनने का सपना दिखा रहा है। कभी जीतने पर 1 करोड़ तो कभी दो करोड़ और आजकल 4 करोड़ की राशि जीतने पर दी जा रही है। इस चक्कर में लाखों युवाओं को इस खेल की लत लगी हुई है और अपनी वर्षों की मेहनत की कमाई को यूं ही बर्बाद करने में लगे हुए हैं। सरकारी क्षेत्र में तैनात कर्मचारी भी इसका शिकार बनते जा रहे है। आखिर बने भी क्यों न । दिन में कोई भी चैनल खोलें तो ड्रीम 11 का विज्ञापन पल पल आपके आंखों के सामने चलता रहेगा। बड़े-बड़े सितारे इस खेल का प्रचार करते देखे जाते हैं और विज्ञापन के अंत में यह जरूर बोलते है कि इसमें वित्तीय जोखिम है और इसकी लत लग सकती है। जब आस पड़ोस में कोई आदमी करोड़पति बनता। है तो दिमाग का कीड़ा और जाग जाता है कि जब यह जीत सकता है तो मैं क्यों नही ? युवाओं को इस खेल की लत लगी, वित्तीय जोखिम बना मानसिक बीमारी का कारण देखा देखी में एक नहीं कई टीमें लगाकर करोड़पति बनने की फिराक में रहते हैं। ड्रीम 11 एक ऐसी ऐप है, जिसपर लोग किसी भी मैच से पहले अपनी क्रिकेट टीम बनाते हैं यानी दोनों टीमों की खिलाडयिों से अपने मन के हिसाब से खिलाड़ी चुनते हैं और फिर पॉइंट्स के आधार पर उन्हें पैसे मिलते हैं. इस ऐप की शुरुआत साल 2016 में हुई थी और माना जाता है कि इस तरह के गेम के लिए यह ऐप सेफ है, साथ ही जितने भी लोग इसमें टीम बनाते हैं, उनके पॉइंट्स की रैंक के आधार पर उन्हें पैसे मिलते हैं. इसके माध्यम से आप क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों के मैच में भी टीम बनाते हैं, जिनका पॉइंट सिस्टम अलग अलग है। अब तो देखा देखी की होड़ में 15-20 टीमें बनाने की फिराक में रहते ही है।लालच आता ही है। लेकिन यह लालच न आये उसकी दृढ़ शक्ति कम ही होती है। ऐसे भी कई लोग है जो ड्रीम 11 रुपए लगा कर शिकार हो रहें है। 59 रुपये लगाकर करोड़पति बनने का सपना जब टूट जाए तो मुफ्त में गए क्योकि सामने वाले ने पहले ही बोला था वित्तीय जोखिम है। लेकिन आपने नहीं सुनी बर्बादी में युवा पीढ़ी ही नहीं कई बुद्धिजीवी भी प्रतिदिन हजारों रुपए इस खेल में लगा रहे इस खेल में प्रतिदिन पैसे की बर्बादी देख परिजन भी मानसिक तनाव से पीड़ित हो रहें है। वहीं छोटी- छोटी बातों पर परिजनों में नोक झोंक भी हो जाती। युवाओं में चिड़चिड़ापन देखा जा रहा है, ये खेल नशे की भाति युवाओं के मानसिक संतुलन को खोखला कर रहा है। समाज का एक धड़ा इस खेल को सही मानता है और एक घढे ने इसे आधुनिक जुए की संज्ञा दी है। अब युवाओं और बुद्धिजीवियों को खुद तय करना है कि इस खेल में भाग लेना है या दूरी बनानी है।


