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जिस थाने में एसओ रहे, उसी में मुकदमा दर्ज, फर्जी मुकदमा दर्ज करने वाला एसओ जाएगा जेल, कमिश्नर बोले-पुलिस की इमेज खराब हुई।

आगरा के थाना जगदीशपुरा इलाके में करोड़ों रुपए की संपत्ति से कब्जा हटवाने के मामले में पुलिस और भूमाफियाओं का गठजोड़ सामने आया है। डीजीपी से शिकायत के बाद पुलिस कमिश्नर डॉक्टर प्रीतिन्दर सिंह ने कमल चौधरी और उसके बेटे धीरू चौधरी समेत तत्कालीन थाना अध्यक्ष जितेंद्र कुमार और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।* फिल्मी अंदाज में लगभग 10 हजार गज जमीन पर भू माफिया और पुलिस की सांठ गाँठ से कब्जा हो गया। मौक़े पर मौजूद जो कुशवाह समाज के कब्जेदार थे उन्हें पुलिस ने झूठे मुकदमे में जेल भेज दिया। भूमाफियाओं के मंसूबे पूरे हो गए और उन्होंने करोड़ों रुपए की संपत्ति पर बाउंड्री बाल लगाकर सीसीटीवी से निगरानी भी शुरू कर दी। भू माफिया दागी पुलिसकर्मी और शहर का चर्चित चेहरा करोड़ों रुपए की संपत्ति पर कब्जा करने के बाद शहर में बड़ी शान से घूम रहे थे। लेकिन यह लोग यह भूल गए कि अब उत्तर प्रदेश में बाबा की सरकार है जो जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। जैसे ही बाबा के लखनऊ बैठे अधिकारियों को पूरे मामले की भनक लगी वैसे ही लखनऊ से एक अधिकारी को गोपनीय जांच के लिए आगरा रवाना किया गया। जांच में एक चर्चित व्यक्ति का नाम सामने आया बताया गया कि इस चर्चित व्यक्ति द्वारा भू माफिया और थाना जगदीशपुरा पुलिस की सांठ गांठ कराई गई। जब सांठगांठ हो गई तो पुलिस ने भू माफिया के इशारे पर वहां रह रहे लोगों को गांजे की तस्करी में फर्जी मुकदमे में जेल भेज दिया। पुलिस ने इतना क्रूर रूप इख्तियार कर लिया कि पुलिस ने गरीब मजलूम महिलाओं को भी नहीं बक्शा। उन्हें भी शराब तस्करी में जेल भेज दिया गया।जैसे ही जांच रिपोर्ट डीजीपी की टेबल पर पहुंची तो वहां से तुरंत पुलिस कमिश्नर डॉ. प्रीतिन्दर सिंह को इस मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। पुलिस कमिश्नर के आदेश पर तत्कालीन थाना अध्यक्ष जितेंद्र कुमार समेत चार पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन पुलिस की बर्बरता का शिकार हुए परिवार ने इस कार्रवाई पर असंतोष जताया। वही इस पूरे मामले की भनक जैसे ही फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर को लगी तो उन्होंने सरकार की किरकिरी कराने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और भू माफिया की शिकायत भी पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करने की बात कही। सांसद राजकुमार चाहर के हस्तक्षेप करते ही यह पूरा मामला और तूल पकड़ गया। *राज कुमार चाहर सांसद फतेहपुर सीकरी* जैसे ही पूरे मामले को लेकर राजनीति गरमानें लगी वैसी ही पुलिस कमिश्नर डॉक्टर प्रीतिन्दर सिंह ने तुरंत पूरे मामले में थाना जगदीशपुरा में एक मुकदमा दर्ज करा दिया। मुकदमे में कमल चौधरी और उसके बेटे धीरू चौधरी तत्कालीन थाना इंचार्ज जितेंद्र कुमार और 15 अज्ञात लोगों को शामिल किया गया है। पुलिस कमिश्नर डॉक्टर प्रीतिन्दर सिंह ने प्रेस वार्ता में कहां है कि इस पूरे घटनाक्रम से पुलिस की छवि खराब हुई है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की पूरी कोशिश की जाएगी। जिस जगह से उन्हें साजिश के तहत हटाया गया था वहां उन्हें बसाया जा रहा है। वही इस प्रकरण में पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। भू माफिया को भी बक्शा नहीं जाएगा और जो भी लोग इस पूरे प्रकरण में शामिल हैं। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मुकदमे में विवेचना के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।एसआईटी में डीसीपी सिटी सूरज राय शामिल हैं। सूरज राय की नेतृत्व में दोषियों के खिलाफ जांच के बाद निश्चित ही कार्रवाई की जाएगी। *डॉ. प्रीतिन्दर सिंह पुलिस कमिश्नर आगरा* मुकदमा दर्ज होने के बाद कमल चौधरी उसका बेटा धीरू चौधरी और तत्कालीन थाना इंचार्ज और पुलिसकर्मियों समेत 15 अज्ञात लोगों की जान हलक में आ गई है। षड्यंत्र के तहत कुशवाहा समाज के परिवार को बेघर करने के बाद उन्हें जेल भेजने वाले षड्यंत्रकारी अब खुद जेल जाने के डर से थरथर कप रहे हैं। क्योंकि यह जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में योगीराज है।और इस योगी राज में सांसद राजकुमार चाहर ने भी भू माफिया और आसामाजिक तत्वों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दूसरों के घरों को कब्ज़ाने वाले अब बाबा के बुलडोजर से खुदके मेहलों को बचाने में लगे हुए हैं। अब देखना होगा कि लंबे समय से सिस्टम के साथ आंख में मिचोली खेलने वाले कमल चौधरी और उसके गुर्गे बाबा के सिस्टम की आंख से खुद को कैसे बचा पाते हैं।

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