ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री ने भुगतान के प्रस्ताव पर किए हस्ताक्षर, एक क्लिक के जरिए मजदूरों के खाते में पहुंचेगा पैसा

इंदौर। हुकमचंद मिल के 5895 मजदूर और उनके स्वजन का 32 वर्षों का इंतजार खत्म होने का समय आ गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने मजदूरों के भुगतान के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए। बहुत जल्दी कार्यक्रम आयोजित कर मिल के मजदूरों का भुगतान एक क्लिक पर उनके खाते में पहुंचा दिया जाएगा।

शासन बुधवार को हुकमचंद मिल मामले में हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई में इसकी जानकारी कोर्ट को दे देगा। हाउसिंग बोर्ड मिल के देनदारों के लिए 425 करोड़ 89 लाख रुपये पहले ही स्टेट बैंक आफ इंडिया की भोपाल शाखा में जमा करा चुका है। मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर के बाद अब यह रकम देनदारों के खातों में ट्रांसफर होने का सिलसिला शुरू होगा। संभवत: 26 दिसंबर को मुख्यमंत्री इसकी शुरुआत करेंगे।

32 वर्षों से भुगतान के लिए भटक रहे थे मजदूर

करीब 32 वर्ष पहले 12 दिसंबर 1991 को हुकमचंद मिल बंद हुआ था। इसके बाद से मिल के 5895 मजदूर और उनके स्वजन अपने बकाया भुगतान के लिए भटक रहे थे। हाई कोर्ट ने 6 अगस्त 2007 को हाई कोर्ट ने मिल के मजदूरों के पक्ष में 228 करोड़ 79 लाख 79 हजार 208 रुपये मुआवाज तय किया था, लेकिन इस रकम का पूरा भुगतान मजदूरों को नहीं हो सका। वर्ष 2017 में जरूर कोर्ट के आदेश पर शासन ने मजदूरों के लिए 50 करोड़ रुपये जारी किए थे। मजदूरों का भुगतान मिल की जमीन को बेचकर होना था, लेकिन जमीन बिक नहीं सकी।

Related Articles

Back to top button