ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश

कालोनी के मास्टर प्लान में बदलाव के लिए प्रति हेक्टेयर दस हजार रुपये देना होगा शुल्क

भोपाल। मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय (टीएनसीपी) में अब एक सिटी प्लानर भी होगा। राज्य सरकार टीएनसीपी के संचालक की सहायता के लिए मुख्य नगर निवेशक (चीफ सिटी प्लानर) और अन्य अधिकारियों को नियुक्त कर सकेगी। राज्य सरकार ने 11 साल पहले बने मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश नियम 2012 में बदलाव का प्रारूप जारी कर दिया है।

ये बदलाव 10 जून से प्रभावशील हो जाएंगे। इसमें चीफ सिटी प्लानर को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा भूखंड या कालोनी के मास्टर प्लान या जोनल प्लान में बदलाव के लिए भूस्वामी को आवेदन के साथ दो गुनी फीस भी देनी होगी। पहले आवेदन के साथ पांच हजार रुपये प्रति हेक्टेयर शुल्क जमा करना होता था, जिसके बढ़ाकर अब दस हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है।

बता दें कि मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश नियम 2012 में प्रविधान था कि संचालक टीएनसीपी की सहायता के लिए राज्य सरकार सहायक संचालक, उप संचालक, संयुक्त संचालक, अपर संचालक और अन्य अधिकारियों को नियुक्त कर सकेगी, लेकिन अब इसके स्थान पर चीफ सिटी प्लानर और अन्य अधिकारियों को नियुक्ति के अधिकार को शामिल किया गया है।

मास्टर या जोनल प्लान में परिवर्तन के ब्यौरे अब सिटी प्लानर के कार्यालय में उपलब्ध कराए जाएंगे। एक बदलाव यह भी किया गया है कि उपांतरण (प्लान में परिवर्तन) के लिए आवेदित भूमि चारों ओर से समुचित अनुमति प्राप्त विकसित क्षेत्र के भीतर स्थित होने अथवा प्राकृतिक / भौतिक संरचनाओं (जिनमें शामिल हैं नदी, वन क्षेत्र, पहाड़ी क्षेत्र, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, मुख्य जिला सड़क मार्ग व रेलवे भूमि) द्वारा अवरुद्ध हो, वहां आवेदन प्रस्तुत करने के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल की आवश्यकता की कोई शर्त नहीं होगी।

Related Articles

Back to top button