ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
उत्तरप्रदेश

विधायक ने की ‘लव जिहाद’ मामलों में कड़ी सजा की मांग

लखनऊ| भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजेश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जघन्य अपराधों से निपटने के लिए राज्य के कानूनों में संशोधन करने और ‘लव जिहाद’ के लिए ‘कड़ी’ सजा प्रस्तावित करने का आग्रह किया है। छह पन्नों के पत्र में सिंह ने यूपी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 में संशोधन की मांग की। उन्होंने कहा कि लव जिहाद के मामलों में प्रलोभन की परिभाषा को व्यापक बनाने की आवश्यकता है और इसमें शादी, शादी का वादा या दांपत्य संबंध या लिव-इन संबंध शामिल होना चाहिए।

सिंह के पत्र की एक प्रति केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू को भी भेजी गई है।

विधायक इस साल मई में दिल्ली के महरौली इलाके में 27 वर्षीय श्रद्धा विकास वाकर की उसके साथी आफताब अमीन पूनावाला (28) द्वारा कथित तौर पर हत्या का जिक्र कर रहे थे।

पुलिस के अनुसार पूनावाला ने कथित तौर पर वाकर का गला घोंट दिया था और उसकी लाश के 35 टुकड़े कर दिए थे और उसे जंगल में फेंक दिया था।

लखनऊ के सरोजनी नगर के विधायक सिंह ने लिखा, इस तरह के जघन्य अपराध नियमित आपराधिक कृत्यों के रूप में माने जाने के लायक नहीं हैं। ऐसे मामलों की जांच व सुनवाई व सजा फास्ट-ट्रैक के आधार पर किया जाना चाहिए।

विधायक ने कहा, भविष्य में इस तरह के अपराधों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए आवश्यक है कि हम जांच और मुकदमे के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम अपनाएं। केस दर्ज होने के 60 दिनों के भीतर जांच पूरी हो जाए और उसके बाद 60 दिनों के भीतर उसकी सुनवाई पूरी कर ली जाए।

Related Articles

Back to top button