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मध्यप्रदेश

ग्वालियर पाषाणों का हृदय भेद कर्तव्यों का करूँ निर्वहन

ग्वालियर शहर की प्रतिष्ठित साहितन की डिबिया में धरो है एक मोती मन को त्यिक संस्था 'राष्ट्रीय साहित्य कला मंच' पर कल शाम काव्य संध्या का भव्य आयोजन गंगा दास की बड़ी शाला में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत श्री राम दास जी महाराज के द्वारा की गई कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ रविंद्र नाथ मिश्र एवं विशिष्ट अतिथि अंशु भदौरिया जी एवं डॉ मनीषा गिरी थी ।कार्यक्रम का संचालन ख्याति प्राप्त राष्ट्रीय कवि रविन्द्र रवि ने किया । इस अवसर पर ग्वालियर शहर के अतिरिक्त अन्य राज्यों के भी लब्ध प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां दी इस काव्य संध्या में आगरा से डॉ राजकुमार रंजन और धौलपुर से रजिया बेगम ने गजल और गीत गाकर देर रात तक समा बांधा... प्रीत के गीत गाती रहे जिंदगी फूल सी मुस्कुराती रहे जिंदगी जगमगाते हुए दीपकों की तरह आपकी जगमगाती रहे जिंदगी -रविन्द्र रवि पाषाणों का हृदय भेद कर्तव्यों का करूँ निर्वहन। सूरज की लाली लेकर करूँ धरा का नित आचमन। -डॉ. ज्योत्स्ना सिंह राजावत कभी तो दिन बीतेंगे सीते, कभी तो रघुवर आएंगे मेरे मन की व्यथा को कभी तो बे पढ़ जाएंगे -डॉ निशि भदौरिया शब्द स्वर से मिले और मधुर हो गए भाव तुमसे मिले और मुखर हो गए -अर्चना अर्पण सभी कुछ साथ में मिलना नहीं आसान होता है मिले जो साथ में सब कुछ वही वरदान होता है -आरती अक्षत न राधा बनाना, न मीरा बनाना मुझे मेरे कान्हा सुभद्रा बनाना -पुष्पा मिश्रा आनंद मत कहो मन की व्यथा तुम हर किसी से, लोग समझेंगे नहीं उपहास की बातें करेंगे। अंशु भदौरिया तन की डिबिया में धरो है एक मोती मन को छिन छिन बीते भोर दोपहरी श्याम सलोनी रतिया।। डॉक्टर राजकुमार रंजन वह जिंदगी में आए लमहे सँवर गए ,दिल की लगी जताने उनके शहर गए। रजिया बेगम हर बार मैं सोचा करूं अब की बार मैं क्या लिखूं कविता है शब्द कविता है शब्द भाव हैं.. रचना पटवर्धन जिसको जितना मिलना था उसने उतना पाया किसी को सुख की धूप मिली तो किसी को दुख की छाया।। सीता चौहान अश्क मेरे तुझसे पूछें, आहे पीड़ा पालती l मुझ में भी संभावनाएं, क्यों नहीं पहचानती l मुझको भी आकार दो, मेरा पिघलना रोक लो l उमा उपाध्याय याद जब-जब शहीदों की आती मुझे आँखे रोए बिना ही रूलाती मुझे। ~ डॉ.मनीषा गिरि "मनमुग्ध" मिले सारी खुदाई की बद्दुआ जो मन बेचते हैं नर्क भी ना पा सके में जो अपना तन बेचते हैं अमर सिंह यादव देश की माटी का कण कण प्राणों से भी प्यारा है हिंदुस्तान हमारा है हिंदुस्तान हमारा है डॉ. रमेश त्रिपाठी मछण्ड इसके अतिरिक्त शहर के अन्य कवियों ने भी बहुत श्रेष्ठ काव्य पाठ किया जिसमें रविंद्र नाथ मिश्र, रामचरण चिराड़, डॉक्टर मनीषा गिरी, एम एल सिंघल, राज ,अशोक बित्थारिया किंकर पाल सिंह, राजहंस त्यागी, उमा उपाध्याय एवं अन्य साहित्य प्रेमी श्रोता गण कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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