ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
पंजाब

इंजेक्शन का स्टॉक 10 अक्तूबर तक था मौजूद; RTI में हुआ खुलासा

चंडीगढ़: चंडीगढ़ सेक्टर 12 स्थित PGI हॉस्पिटल।चंडीगढ़ PGI में बीते अगस्त में प्रोपोफोल इंजेक्शन से अगस्त में हुई पांच मरीजों की मौत के बाद भी इंस्टीट्यूट ने सितंबर में प्रोपोफोल इंजेक्शंस का आर्डर दिया था। वहीं 10 अक्तूबर तक PGI में 4,944 एनेस्थेटिक प्रोपोफोल इंजेक्शंस(वायल्स) का स्टॉक मौजूद था। यह चौंकाने वाली जानकारी एक RTI के तहत सामने आई है। यह वायल्स PGI की फार्मेसी में मौजूद थे। जानकारी में यह भी सामने आया है कि यह इंजेक्शंस M/s लियोन लेबोरेट्रीज लिमिटेड से बीते 5 सितंबर को आर्डर जारी कर खरीदे गए थे।वहीं इससे कुछ दिन पहले अगस्त में एक ही दिन में 5 मरीजों को सर्जरी से पहले एनेस्थेटिक प्रोपोफोल इंजेक्शन लगाने के बाद उनकी मौत हो गई थी।वहीं जानकारी के मुताबिक सितंबर महीने से पहले PGI में भर्ती मरीजों के अटेंडेंट्स को PGI के इमरजेंसी वार्ड में बनी केमिस्ट शॉप से यह इंजेक्शन खरीद कर लाने को कहा गया था। यह निजी केमिस्ट इंस्टीट्यूट को 1.8 करोड़ रुपए दुकान का किराया देता है। सेक्टर 22 के प्रिंस नामक व्यक्ति ने यह RTI दायर की थी।CDCSO की टीम ने भी लिए थे सैंपलबता दें कि PGI ने यह मामला चंडीगढ़ प्रशासन के समक्ष बीते 2 सितंबर को रखा था। प्रोपोवन(प्रोपोफोल इंजेक्शन) की जांच को PGI डॉक्टरों की हाई-लेवल कमेटी ने प्रशासन से मामले में विचार किया था। मामले में इंस्टीट्यूट द्वारा जांच के लिए एक कमेटी भी बनाई गई थी। वहीं दूसरी ओर मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल ड्रग कंट्रोल स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन(CDCSO) ने भी बीते 6 सितंबर से PGI से सैंपल लिए थे।इसके बाद सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी, कोलकाता ने जांच में पाया था कि ड्रग स्टैंडर्ड क्वालिटी का नहीं था। यह स्टेरिलिटी, फ्री फैटी एसिड, pH, प्रोपोफोल डिमर और बेक्टिओन टेस्ट में फेल हो गया था। ऐसे में संबंधित बैच के मौजूद चारों इंजेक्शन PGI की फार्मेसी से हटा दिए गए थे। वहीं इंजेक्शन के पंचकूला स्थित डिस्ट्रिब्यूटर को भी आदेश दिए गए थे कि जांच पूरी होने तक चंडीगढ़ में इस इंजेक्शन का स्टॉक न बेचा जाए।दवाई विक्रेताओं को भी नोटिस हुआ थावहीं दूसरी ओर चंडीगढ़ प्रशासन ने ड्रग एंड कोस्मेटिक एक्ट, 1940 के प्रावधानों के तहत PGI के इमरजेंसी ब्लॉक में बनी केमिस्ट शॉप के संचालक, सारंगपुर में बनी एक केमिस्ट शॉप और पंचकूला सेक्टर 20 के एक होलसेलर ट्रेडर को नोटिस जारी किए थे। इन्हें तुरंत प्रभाव से प्रोपोवन के संबंधित बैच के इंजेक्शन वापस लेने को कहा था।

Related Articles

Back to top button