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मध्यप्रदेश

रामभक्ति में लीन पूरी सोसायटी, तीन दिन तक 500 फ्लैट में नहीं जला चूल्हा

इंदौर। राम, सियाराम, रामलला, जय श्रीराम… इस समय हर जगह केवल प्रभु राम के ऐसे जयकारे सुनने और देखने को मिल रहे हैं। वैसे तो चूल्हा न जलना शोक का प्रतीक माना जाता है, लेकिन शनिवार से सोमवार तक निपानिया स्थित बालाजी स्काइज में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में करीब 500 फ्लैट्स में तीन दिन से भोजन नहीं बना। इसका कारण पूरी सोसायटी के लिए एक ही जगह भोजन बनना रहा। करीब 1200 रहवासियों ने तीनों दिन तीनों समय एक साथ भोजन किया और राम भक्ति में लीन रहे। यह सोसायटी अयोध्या का रूप ले चुकी थी।

सामान्यत: ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा देखने को मिलता है कि वह किसी उत्सव को पूरे गांव के साथ मनाए। परंतु ये घटना एक पाश टाउनशिप की है। बालाजी स्काइज के सभी फ्लैट्स में नौकरशाह, व्यवसायी और उद्यमी जैसे उच्च श्रेणी के लोग रहते हैं। जैसा कि शहरी क्षेत्रों में होता है, अभी ये रहवासी आपस में एक-दूसरे को जानते भी नहीं थे। तीन दिन के कार्यक्रम में पूरी सोसायटी एक परिवार बन चुकी है।
बालाजी स्काइज राम मंदिर उत्सव समिति द्वारा तीनों दिन के लिए सोसायटी को अयोध्या का स्वरूप दे दिया। सोसायटी में स्थित मंदिर पर शनिवार शाम सुंदकांड पाठ के सामूहिक पाठ के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। रविवार को अमृत कलश यात्रा निकली, जिसमें सभी सोसायटी वासियों ने भाग लिया। अंतिम दिन सोमवार को रामायण पाठ, प्राण प्रतिष्ठा का सीधा प्रसारण, शाम को महाआरती और दीपदान के कार्यक्रम हुए।
करीब 1008 दीपों का प्रज्जवलन हुआ। उत्सव समिति के विष्णु दुबे ने बताया कि महिलाएं भी राम भक्ति में शामिल हों, इसके लिए भोजन का प्रबंध एक ही स्थान पर किया गया। इससे पूरी सोसायटी की महिलाएं तीनों दिन रसोईघर से मुक्त रहीं। धार्मिक कार्यक्रम में महिलाओं के पूरे दिन शामिल होने से पूरी सोसायटी राममय रही। भोजन की चिंता ने होने से सभी ने पूरे मन से रामभक्ति की।
किराएदारों ने फ्लैट खरीदने का निर्णय लिया
उत्सव समिति के विष्णु दुबे ने बताया कि सोसायटी में सभी लोगों की मदद से यह उत्सव मनाया गया। कई लोग यहां किराए पर रहते हैं। इतना पारिवारिक माहौल देखकर अब उन्होंने यहीं फ्लैट खरीदने का निर्णय कर लिया है। अभी तक मैं खुद 70 प्रतिशत लोगों को नहीं जानता था। इस आयोजन में सबने हाथ बंटाया। तीन दिन में एक ही व्यक्ति से कई बार मिलना हुआ। ऐसे में लोगों के रिश्ते काफी मधुर हो गए।
लोगों ने कार्यालयों से लीं छुट्टी
दुबे ने बताया कि मेरा आफिस शनिवार-रविवार को भी होता है। सोसायटी के इस भव्य आयोजन के लिए मैं और कई लोगों ने छुट्टियां लीं। हमारे कार्यालय के लोग भी आयोजन में शामिल हुए।
तीनों दिन ऐसी रही व्यवस्था-
– शनिवार: (कलर कोड लाल)
शाम 7 से रात 10 बजे तक सुंदरकांड का पाठ
रात 8 से 10.30 तक प्रसादी।
व्यंजन- पाव भाजी, पुलाव, हलवा और चाय।
– रविवार: (कलर कोड पीला या आरेंज)
– सुबह 8 से 9 बजे तक अल्पाहार (पोहा, आलूबड़ा और चाय), (फरियाली खिचड़ी उपवास वालों के लिए)।
– सुबह 9.30-11 कलश यात्रा।
– सुबह 11 बजे से अखंड रामायण पाठ।
– दोपहर में पूरी-सब्जी।
– रात 8 से 10 बजे तक भोजन (बटर खिचड़ी), (फरियाली खिचड़ी उपवास वालों के लिए)।

सोमवार-

– सुबह 8 से 9 बजे तक नाश्ता (पोहा, खमंड और चाय)।

– 11 बजे से अखंड रामायण की पूर्णाहुति और अयोध्या के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण।

– दोपहर 1 से 3 बजे खाना (छोले भटूरे, गुलाब जामुन)।

– शाम 7 बजे से सामूहिक महाआरती और दीपोत्सव।

– रात 8 से 10 बजे तक भंडारा।

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