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संतान की दीघार्यु की कामना के लिए अहोई अष्टमी व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि

भोपाल। रविवार, 05 नवंबर को यानी आज कार्तिक कृष्ण अष्टमी है। इसे अहोई अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं संतान सुख, बच्चे की दीर्घायु और उसके अच्छे भविष्य की कामना से व्रत रखेंगी। इसे अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है। पंडित आलोक उपाध्याय व विष्णु राजौरिया ने बताया कि करवा चौथ की तरह ही अहोई अष्टमी का व्रत भी काफी कठिन होता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन जल तक ग्रहण नहीं करती हैं। आकाश में तारों को देखने के बाद ही उपवास तोड़ा जाता है।

अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त

अष्टमी तिथि पूजन का समय शाम पांच बजकर 33 मिनट से लेकर शाम छह बजकर 52 मिनट तक रहेगा। यानी पूजन के लिए आपको सिर्फ एक घंटा 19 मिनट का ही समय मिल सकेगा। तारे दिखने का समय शाम करीब छह बजकर दो मिनट रहेगा। इस समय व्रत का पारण किया जा सकेगा। अहोई अष्टमी के साथ ही रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है।

पूजा विधि

अहोई अष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। इसके बाद दिनभर उपवास का संकल्प लें। अहोई अष्टमी की पूजा की तैयारी सूर्यास्त से पहले ही संपन्न की जाती है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले दीवार पर अहोई माता का फोटो लगाया जाता है। अहोई माता का चित्र अष्ट कोष्टक होगा, तो बेहतर है। उसके बाद लकड़ी की एक चौकी सजाएं और माता के चित्र की बायीं तरफ पवित्र जल से भरा कलश रखे। कलश पर स्वस्तिक का चिह्न बनाकर मौली बांध दें। इसके बाद दीपक अगरबत्ती आदि लगाकर माता को पूरी, हलवा तथा पुआ आदि का भोग लगाएं। इस भोजन को वायन भी कहा जाता है। इसके अलावा अनाज जैसे ज्वार अथवा कच्चा भोजन (सीधा) भी मां को पूजा में अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद परिवार की सबसे बड़ी महिला अन्य सभी महिलाओं को इस व्रत की कथा पढ़कर सुनाए। कथा सुनते समय याद रखें कि सभी महिलाएं अपने हाथ में अनाज के सात दाने रख लें। इसके बाद पूजा के अंत में अहोई अष्टमी आरती करें।

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