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चंबल नदी के रेतीले टापुओं पर इंडियन स्कीमर के अंडों से निकले चूजे

भिंड। चंबल नदी के किनारे रेत के टापुओं पर विलुप्त प्रजाति के पक्षी इंडियन स्कीमर के अंडों से चूजे निकलना शुरू हो गए हैं। वर्ष 2011 में यहां इंडियन स्कीमर की संख्या 224 रह गई थी। वन विभाग ने इनका कुनबा बढ़ाने के लिए मुंबई की बीएनएचएस (बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी) संस्था के सहयोग से नदी किनारे निगरानी की व्यवस्था की। जिसका परिणाम यह है कि इनकी संख्या 740 तक पहुंच गई है।

दुनिया में इंडियन स्कीमर पक्षी का सबसे बड़ा घर होने का गौरव चंबल नदी को ही है। नदी का साफ पानी और बीहड़ में सुरक्षित आवास होने की वजह से विलुप्त प्रजाति के इन पक्षियों की 80 प्रतिशत आबादी यहां पाई जाती है। हाल ही में हुए सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार इस साल 190 नए इंडियन स्कीमर आए हैं।

ये नदी के बीच में बने टापुओं पर अंडे देते हैं, जिनसे अब चूजे निकलना शुरू हो गए हैं। ये चूजे कुछ ही दिन में उड़ान भरने को तैयार हो जाएंगे। नदी में इंडियन स्कीमर नवंबर से जुलाई तक बसेरा करते हैं,मार्च से मई तक इनका प्रजनन काल होता है।

जुलाई-अगस्त में जब चूजे उड़ान भरने में परिपक्व हो जाते हैं और बारिश के कारण चंबल के टापू डूब जाते हैं तो यह पक्षी गुजरात के जाम नगर से लेकर आंध्रप्रदेश, पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार (वर्मा) तक पहुंच जाते हैं। मानसून सीजन बीतने के बाद चंबल में फिर लौट आते हैं।

पक्षियों के संरक्षण का काम करने वाली संस्था बीएनएचएस शिकारी पक्षी, सर्प व अन्य जानवरों से इंडियन स्कीमर के अंडों की रखवाली करने का काम करती है। संस्था की सदस्य परवीन खान ने बताया कि यह पक्षी नदी को स्वच्छ भी रखते हैं, क्योंकि विशेषकर यह ऐसी मछलियों का शिकार करते हैं, जो पानी में गंदगी बढ़ाती हैं।

वन विभाग के एसडीओ भूरा रायकवाड़ ने बताया कि श्योपुर से लेकर भिंड के बरही तक इंडीयन स्कीमर ने जिन टापुओं पर सबसे ज्यादा अंडे दिए हैं, ऐसे 25 प्वाइंट(स्थान) चिह्नित कर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जिससे कोई जानवर स्कीमर के बच्चों ओर अंडों को नुकसान न पहुंचा सके।

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