ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
देश

पगड़ी में लगाई जाने वाली पाग के आकार का होगा बुरहानपुर का गुरु गोविंद सिंह संग्रहालय

 बुरहानपुर । एतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासतों से देश और दुनिया के लोगों को परिचित कराने का बेहतर माध्यम संग्रहालय होते हैं। इनमें रखी जाने वाली प्राचीन वस्तुएं उस दौर की समृद्धता और संस्कृति से हमें परिचित कराती हैं। इसी उद्देश्य से जिले में बहादरपुर गांव के पास चार साल पहले गुरु गोविंद सिंह संग्रहालय के निर्माण की आधारशिला रखी गई थी।

17 करोड़ की लागत से 5 एकड़ भूमि में होगा तैयार

इस भवन की ड्राइंग डिजाइन सिक्ख समुदाय द्वारा पगड़ी में लगाई जाने वाली पाग के आकार की रखी गई है। दुखद पहलू है कि 17 करोड़ की लागत से करीब पांच एकड़ भूमि पर बनने वाला यह संग्रहालय अब तक बन कर तैयार नहीं हो पाया है।

जल्द पूरा होगा निर्माण कार्य

निर्माण कार्य पुरातत्व और पर्यटन विभाग की देखरेख में बेहद धीमी गति से चल रहा है। गुरुवार को विश्व संग्रहालय दिवस मनाया जा रहा है। नगर के इतिहासकारों का कहना है कि इसका निर्माण जल्द पूरा कराया जाना चाहिए। ज्ञात हो कि पूर्व में प्रस्तावित भूमि में अतिक्रमण और विवाद की स्थिति बनने के कारण करीब दो साल मामला अटका रहा है। अब जाकर निर्माण की सभी बाधाएं दूर हो सकी हैं।

वस्तुएं ही नहीं सभ्यता भी शामिल हो

नगर के इतिहासकार व जिला पुरातत्व एवं पर्यटन परिषद (डीएटीसी) के सदस्य होशंग हवलदार का मानना है कि संग्रहालय में सिर्फ वस्तुएं ही नहीं रखी जानी चाहिए। इसमें नगर की संस्कृति और सभ्यता को भी शामिल किया जाना चाहिए। यह नगर हजारों साल पुराना है।

कच्चे मकानों से हमने किस तरह पक्के मकान बनाए और कितनी मंजिल से प्रारंभ किए, जल संग्रह किस तरह किया, पूर्व के हथियार बरछी, तीर, भाले, कौड़ी, पाई, रुपया सहित अन्य वस्तुओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। संग्रहालय का निर्माण पूर्ण होने के बाद डीएटीसी के माध्यम से बात रखी जाएगी।

फरवरी माह से भूमि हमें उपलब्ध कराई गई है। दो माह में भवन का निर्माण प्लिंथ लेवल तक पहुंच गया है। उम्मीद है इस साल के अंत तक निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इसकी ड्राइंग डिजाइन बेहद आकर्षक है। – नीलेश सेंगले, इंजीनियर पर्यटन विभाग।

Related Articles

Back to top button