ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
विदेश

पृथ्वी की झीलों नदियों जलाशयों का परीक्षण करेगा नासा का नया उपग्रह 

वाशिंगटन। नासा ने पृथ्वी की झीलों नदियों जलाशयों और समुद्र के पानी का परीक्षण करने के लिए एक पहला उपग्रह लांच किया है। कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट से सरफेस वाटर एंड ओशन टोपोग्राफी अंतरिक्ष यान लांच किया गया। नासा के प्रशासक बिल नेल्सन ने कहा गर्म समुद्र प्रतिकूल मौसम जंगल की आग आदि चुनौतियों का मानवता सामना कर रही है।

नेल्सन ने कहा जलवायु संकट के लिए पूरी तरह से एकजुट द्दष्टिकोण की आवश्यकता है और एसडब्ल्यूओटी एक लंबे समय से चली आ रही अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की उपलब्धि है जो अंतत: समुदायों को बेहतर ढंग से संगठित कर इन चुनौतियों का सामना कर सकेगी। उपग्रह को नासा और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सेंटर नेशनल डीट्यूड्स स्पैटियालेस (सीएनईएस) द्वारा बनाया गया है। अंतरिक्ष यान में कैनेडियन स्पेस एजेंसी और यूके स्पेस एजेंसी का भी योगदान है।

उपग्रह पृथ्वी की सतह के 90 प्रतिशत से अधिक ताजे जल निकायों और समुद्र में पानी की मात्रा को मापेगा। इससे यह पता चल सकेगा कि समुद्र जलवायु परिवर्तन को कैसे प्रभावित करता है। कैसे एक गर्म दुनिया झीलों नदियों और जलाशयों को प्रभावित करती है। बाढ़ जैसी आपदा से कैसे निपटा जा सकता है। एसडब्ल्यूओटी हर 21 दिनों में कम से कम एक बार 78 डिग्री दक्षिण और 78 डिग्री उत्तरी अक्षांश के बीच पूरी पृथ्वी की सतह को कवर करेगा प्रति दिन लगभग एक टेराबाइट डेटा वापस भेजेगा।

Related Articles

Back to top button